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Chhath Puja 2020: बड़कागांव में 1680 में शुरू हुई थी छठ पूजा, सूर्य की उपासना करते थे राजा दलेल सिंह

By Prabhat Khabar Digital Desk
Updated Date
Chhath Puja 2020: बड़कागांव में 1680 में शुरू हुई थी छठ पूजा, सूर्य की उपासना करते थे राजा दलेल सिंह.
Chhath Puja 2020: बड़कागांव में 1680 में शुरू हुई थी छठ पूजा, सूर्य की उपासना करते थे राजा दलेल सिंह.
Sanjay Sagar

Chhath Puja 2020: बड़कागांव (संजय सागर) : झारखंड की राजधानी रांची से 90 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है हजारीबाग जिला. जिला मुख्यालय से करीब 29 किलोमीटर की दूर है बड़कागांव. बड़कागांव में सन् 1680 से छठ पूजा हो रही है. ऐसे ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. राजा दलेल सिंह खुद सूर्य की उपासना किया करते थे.

दलेल सिंह की पुस्तक शिवसागर के अनुसार, बड़कागांव में छठ महापर्व की शुरुआत राजा दलेल सिंह ने डुमारो नदी में वर्ष 1680 में किया था. मुगलों के आक्रमण से बचने के लिए उन्होंने भगवान सूर्य की उपासना की थी. इसके बाद राजा दलेल सिंह ने बादम में कर्णपुरा राज की राजधानी स्थापित की.

अपने किले को बचाने के लिए उन्होंने हहारो नदी के मार्ग को बदलने के लिए बदमाही पहाड़ को काटकर पंच वाहिनी माता की स्थापना की थी. यहां आज भी पांच दिव्य पूजा की जाती है. बदमाही नदी के तट पर छठ पूजा होती है. राम जानकी मंदिर के पुजारी चिंतामणि महतो ने बताया कि मेघन दास बाबा ने वर्ष 1936 में यहां छठ पूजा की शुरुआत की थी. तब से बड़कागांव में छठ महापर्व मनाने की परंपरा जारी है.

किले को बचाने के लिए उन्होंने हहारो नदी के मार्ग को बदलने के लिए बदमाही पहाड़ को काटकर पंच वाहिनी माता की स्थापना की थी.
किले को बचाने के लिए उन्होंने हहारो नदी के मार्ग को बदलने के लिए बदमाही पहाड़ को काटकर पंच वाहिनी माता की स्थापना की थी.
Sanjay Sagar

आंबेडकर मोहल्ला में सर्वप्रथम केसर राम ने छठ पूजा की थी. दर्जनों लोग हैं, जो वर्षों से बड़कागांव में छठ पूजा कर रहे हैं. इनका कहना है कि छठी मैया की पूजा एवं सूर्य को अर्घ देने से इनकी मनोकामना पूरी होती है. छठ महापर्व में इनकी आस्था है और इसलिए हर साल छठ पूजा करते हैं.

Posted By : Mithilesh Jha

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