हजारीबाग : झामुमो नेत्री साबी देवी (पति-स्व तिलेश्वर साहू) भाजपा में शामिल हुई है. बरही विधानसभा सीट पर वे स्व तिलेश्वर साहू की राजनीतिक क्रिया-कलापों पर राजनीति कर रही है. 2014 के विधानसभा चुनाव बरही सीट से आजसू का भाजपा से गठबंधन होने पर झामुमो के टिकट से साबी ने चुनाव लड़ी थी.
तिलेश्वर साहू की हत्या की सहानुभूति लहर व वैश्य जाति की गोलबंदी से लगभग 41 हजार वोट लाने में सफल रही. इसमें कांग्रेस उम्मीदवार मनोज यादव के मुस्लिम वोट व भाजपा उम्मीदवार अकेला यादव के वैश्य वोट पर साबी ने सेंधमारी की थी. बरही सीट पर राजनीतिक समीकरण हमेशा अकेला व मनोज यादव के बीच आमने- सामने का रहा है. इसको भी साबी ने बदलने का काम किया. उन्होंने सीधे मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया था.
लोकसभा चुनाव में भी फायदा व नुकसान का आकलन: जयंत सिन्हा के लिए साबी देवी का पार्टी में शामिल होना फायदेमंद है. विपक्षी दलों के महागठबंधन से साबी के हटने से बरही सीट पर भाजपा को फायदा होगा. वैश्य जाति का वोट भाजपा की ओर बढ़ाने में साबी देवी मददगार साबित होगी. बेहतर प्रदर्शन कर पार्टी से विधानसभा चुनाव लड़ने का रास्ता भी साफ करेगी. लेकिन दूसरा पक्ष साबी देवी मुस्लिम वोट पर सेंधमारी की थी, अब यह वोट विपक्षी गठबंधन की ओर तेजी से खिसक जायेगा. बरही विधानसभा के भाजपा नेताओं के अंतर्कलह का भी विपक्षियों को लाभ मिल सकता है.
2014 लोकसभा चुनाव में बरही में भाजपा को मिली थी बढ़त: बरही विधानसभा से 2014 के लोकसभा में भाजपा के जयंत सिन्हा को 62,633 मत, कांग्रेस के सौरभ नारायण सिंह को 48, 326 मत, आजसू के लोक नाथ महतो को 20056 मत, जेवीएम के एके मिश्रा को 4640, भाकपा के भुवनेश्वर मेहता 4296 मत मिले थे. विपक्ष के गठबंधन बनने से भाजपा की बढ़त पर असर दिखेगा. इसके मद्देनजर पार्टी के आला नेताओं ने साबी देवी को भाजपा में शामिल कराया है. अब साबी देवी के आने से हजारीबाग के लोकसभा क्षेत्र में क्या असर होगा, यह आनेवाले दिनों में स्पष्ट होगा.
बरही विस के भाजपा नेताओं में खलबली
साबी देवी के भाजपा में जाने से वैश्य जाति के भाजपा नेताओं में खलबली मच गयी है. भाजपा के टिकट पर दो बार चुनाव लड़े महावीर साहू, बरही के पूर्व जिप सदस्य अर्जुन साव, चौपारण के पूर्व जिप सदस्य सुनील साव, जो विधानसभा चुनाव के प्रबल दावेदार बने हुए थे. इस जाति से साबी देवी के आने से इन नेताओं के बीच आपसी वर्चस्व दिखेगा. भाजपा से 2009 में विधायक व 2014 में दूसरे स्थान पर रहे अकेला यादव भी साबी देवी को प्रबल प्रतिद्वंद्वी मान रहे है. सभी स्थानीय भाजपा नेता साबी देवी के पार्टी में शामिल होने का स्वागत करने की बात कह रहे है, वहीं महावीर साव ने कहा कि स्थानीय भाजपा कार्यकर्ता और हम जैसे नेताओं को पार्टी में शामिल होने का भनक तक नहीं है. अकेला यादव ने कहा कि हम चुनाव मैदान से हट जायें, तो मनोज यादव को एक लाख से अधिक वोट आ जायेगा. कुल मिला कर बरही विधानसभा सीट के भाजपा दावेदारों में चिंता बढ़ी है. पिछले दिनों जिस तरह से अकेला यादव यशवंत सिन्हा व जयंत सिन्हा का खुल कर विरोध कर रहे थे. इससे भी जोड़ कर साबी देवी को देखा जा रहा है.
