अनुमंडल पदाधिकारी को राज्यपाल के नाम सौंपा मांग पत्र
चतरा : वन अधिकार कानून का लाभ नहीं मिलने के विरोध में झारखंड वन अधिकार मंच ने मंगलवार को रैली निकाली व धरना दिया. रैली समाहरणालय से निकल केसरी चौक होते हुए पुराना कचहरी पहुंच सभा में तब्दील हो गयी. इसके बाद अनुमंडल पदाधिकारी को राज्यपाल के नाम मांग पत्र सौंपा गया. मंच के सदस्यों ने कहा कि ग्रामसभा के अधिकार को प्रशासनिक पदाधिकारी मानने को तैयार नहीं. वक्ताओं ने कहा कि वन अधिकार अधिनियम कानून 2016 में वनों पर आश्रित समुदायों को लाभ पहुंचाने के लिए बना था. लेकिन कुछ पदाधिकारियों की लापरवाही से लोगो को लाभ नहीं मिल रहा है. कहा कि राष्ट्रीय वन नीति, वन अधिकार कानून का अनुरूप नहीं है. इसलिए इसका विरोध कर रहे है. सरकार जंगलों को व्यवसायीकरण कर रही है. वन आश्रितों को उनका अधिकार नहीं दिया जा रहा हैं.
कार्यक्रम में शामिल लोगों ने कानून के क्रियान्वयन को लेकर जिला प्रशासन को गंभीर होने की बात कही. जिला व अनुमंडल स्तर पर कानून का अपेक्षा नहीं करने की मांग की. ग्रामसभा के अनुमति बिना निरस्त व रकवा की कटौती पर पूर्ण विचार करने की मांग की. राजेश कुमार ने वन अधिकार को शक्ति से लागू करने की बात कही. वन संसाधनों का अधिकार ग्रामीणों को देने को कहा. रैली में वन अधिकार के संयोजक राजेश कुमार मुंडा, चेतना भारती के शिवरतन प्रसाद यादव, जोहानी टूटी, रेशमी देवी, विनिता देवी, अमित बाड़ा, प्रसाद टोप्पो, सागर मुंडा, राजा भारती, लल्लू भारती, सिद्धार्थ बानरा समेत कई ने संबोधित किया.
विभिन्न मांगें: कानून के क्रियान्वयन में केंद्र व राज्य सरकार गंभीर हो, जिला व अनुमंडल स्तर के पदाधिकारी कानून को अनदेखी न करें, वन विभाग के हस्तक्षेप पर अंकुश लगाने, गैर कानूनी तरीके से दावित वन क्षेत्र में कटौती व निरस्त नहीं करने, ग्रामसभा के अधिकारों का सम्मान, लघु वन उपज का स्वामित्व ग्रामसभा को देने समेत कई मांग शामिल है.
