बोस आइंसटाइन स्टेटिक्स आधुनिक भौतिक विज्ञान का एक मूलभूत आधार : डॉ राजीव कुमार मित्रा
हजारीबाग : एसएन बोस का बोस आइंसटाइन स्टेटिक्स आधुनिक भौतिक विज्ञान का एक मूलभूत आधार है. जिसे आइंसटाइन ने अनुभव किया था. उक्त बातें एसएन बोस नेशनल सेंटर फोर बेसिक साइंस कोलकाता के वैज्ञानिक डॉ राजीव कुमार मित्रा ने एक दिवसीय सेमिनार में कही.
विभावि ने सोमवार को एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन विवेकानंद सभागार में किया गया. कार्यक्रम एसएन बोस सेंटर फोर बेसिक साइंस कोलकाता एवं विभावि पीजी भौतिक विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया. उद्घाटन विभावि प्रतिकुलपति प्रो कुनुल कंडिर ने किया. सेमिनार विख्यात भारतीय वैज्ञानिक प्रो एसएन बोस की 125वीं जयंती के अवसर पर आयोजित किया गया. सेमिनार में एसएन बोस नेशनल सेंटर से दो वैज्ञानिक प्रो अर्चन एस मजुमदार एवं प्रो राजीव कुमार मित्रा उपस्थित हुए.
प्रो अर्चन एस मजुमदार ने एसएन बोस की जीवनी एवं उनके वैज्ञानिक पहलुओं की जानकारी दी. इन्होंने एसएन बोस के बोस आइंसटाइन स्टेटिक्स की जानकारी दी. इन्होंने एसएन बोस पर आधे घंटे की फिल्म भी प्रस्तुत की.
इन्होंने टेक्नोलॉजी क्वांटम इनफॉरमेटिक्स का कम्प्यूटेशन के क्षेत्र में उपयोग पर व्याख्यान दिया. प्रो राजीव कुमार मित्रा ने जीव विज्ञान सिस्टम में पानी के डायनेमिक्स पर पूरी जानकारी दी. इन्होंने कहा कि एसएन बोस का बोस आइंसटाइन स्टेटिक्स आधुनिक भौतिक विज्ञान का एक मूलभूत आधार है. जिसे आइंसटाइन ने अनुभव किया था. प्रति कुलपति प्रो कुनुल कंडीर ने कहा कि भौतक विज्ञान में विद्यार्थी अपना उत्साह बनाये रखें. विषय के अनुरूप अपने आप को तैयार करें.
विज्ञान पढ़नेवाले सभी विषयों की जानकारी रखें
कार्यक्रम का समापन विभावि कुलपति प्रो रमेश शरण ने किया. उन्होंने कहा कि विज्ञान पढ़नेवाले विद्यार्थियों को सभी विषयों की जानकारी रखनी चाहिए. भौतिकी के छात्रों को इसके अलावा अर्थशास्त्र एवं अन्य क्षेत्रों मे भी कार्य करना चाहिए. इन्होंने शोध के लिये विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया. सेमिनार में विभागाध्यक्ष ने डॉ आर एन सिन्हा, कुल सचिव बंशीधर रूख्यार डॉ अनवर मल्लिक समेत शिक्षक एवं विज्ञान के विद्यार्थी शामिल थे. संचालन पूजा जायसवाल एवं सुष्मिता प्रिया ने किया.
एसएन बोस नेशनल सेंटर फोर बेसिक साइंस से आये हुए वैज्ञानिक प्रो अर्चन एस मजुमदार एवं डा राजीव कुमार मित्रा को प्रतिकुलपति प्रो कुनुल कंडिर ने प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया.
