प्रभात खबर आपके द्वारा : जीते जी नर्क, मरने के बाद मसान तक भी राह नहीं

गुमला जिलांतर्गत सदर प्रखंड की कुम्हरिया पंचायत के खास कुम्हरिया गांव में सड़क नहीं होने के कारण ग्रामीण न केवल नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं,

कुम्हरिया पंचायत में भेदभाव से ग्रामीणों में आक्रोश कुम्हरिया पंचायत के खास कुम्हरिया में सड़क समस्या का दंश झेल रहा 300 परिवार. ग्रामीणों का आरोप : मुखिया कर रहा भेदभाव, खास-खास जगहों पर ही बनवा रहा रोड : वोट डालने के बाद भी किसी प्रकार का लाभ नहीं मिलता को वोट ही नहीं डालेंगे : ग्रामीण जगरनाथ पासवान, गुमला गुमला जिलांतर्गत सदर प्रखंड की कुम्हरिया पंचायत के खास कुम्हरिया गांव में सड़क नहीं होने के कारण ग्रामीण न केवल नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं, बल्कि शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने में भी उन्हें भारी मशक्कत करनी पड़ रही है. इस गांव में लगभग 300 सदान परिवार निवास करते हैं. ग्रामीणों ने पंचायत के मुखिया पर जातिगत भेदभाव का गंभीर आरोप लगाया है. ग्रामीणों का आरोप है कि मुखिया केवल उन इलाकों में पीसीसी सड़क बनवा रहे हैं. जहां आदिवासी मतदाता अधिक हैं. लेकिन सदान बहुल खास कुम्हरिया को भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है. गांव की बदहाली का आलम यह है कि गांव से मसना (श्मशान) की सीधी दूरी महज एक किलोमीटर है. लेकिन मसना तक जाने के लिए सड़क नहीं है. यदि गांव में किसी का निधन हो जाये तो उनके पार्थिव शरीर को कीचड़ और झाड़ियों के बीच से ले जाना पड़ता है. हाल ही में गांव के 55 वर्षीय शिवचरण साहू की हार्ट अटैक से मौत के बाद परिजनों और ग्रामीणों को अंतिम संस्कार के लिए जो परेशानी उठानी पड़ी. सड़क में जगह-जगह गड्ढे हो जाने के कारण हल्की बारिश में भी जगह-जगह पर कीचड़ जमा हो जाता है. लोगों ने समस्या का जल्द निराकरण नहीं होने की स्थिति में सामूहिक रूप से वोट बहिष्कार की भी बात कही. ग्रामीण रीमा देवी ने बताया कि सड़क की बदहाली का सबसे बुरा असर बच्चों पर पड़ रहा है. पास में ही स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र हैं. लेकिन बरसात के दिनों में रास्ता इतना खराब हो जाता है कि बच्चों का वहां पहुंचना दूभर हो जाता है. रीमा देवी ग्रामीण सुरेश साहू ने कहा कि जीते जी तो हम बदहाल सड़क पर चलते ही हैं. लेकिन मरने के बाद भी मसना तक पहुंचने में काफी दिक्कत होती है. बरसात के दिनों में कमर तक पानी में डूबकर मृत देह को मसना तक पहुंचाना पड़ता है. सुरेश साहू गांव की बुजुर्ग महिला मैना देवी ने कहा कि गांव में अनियमितता चरम पर है. सरकारी सुविधा के नाम पर गांव में कुछ भी नहीं है. सड़क की स्थिति खराब है. जिस पर चलना मुश्किल है. स्कूल और आंगनबाड़ी बगल में होने के बावजूद बच्चे हल्की बारिश में वहां नहीं जाते. मैना देवी गांव के बुजुर्ग नंदलाल साहू ने कहा कि हर बार हम मतदान करके एक अच्छे प्रतिनिधि को विजेता बनाते हैं. लेकिन जनप्रतिनिधि अपने उदासीन रवैये के कारण हम लोगों पर ध्यान ही नहीं देते. सड़क नहीं होने के कारण वृद्ध शरीर के साथ इस पथरीले रास्ते पर चलने में काफी डर लगता है. नंदलाली साहू

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Published by: Vikash nath

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