वर्तमान पेसा नियमावली से विकास नहीं होगा : निशा उरांव

आरएसएस के 100 वर्ष पूरा होने पर आदर में नागरिक सम्मेलन का आयोजन

घाघरा. आरएसएस के 100 वर्ष पूरा होने पर आदर में नागरिक सम्मेलन का आयोजन किया गया. सम्मेलन का शुभारंभ मुख्य अतिथि भारतीय राजस्व सेवा के अपर आयकर आयुक्त निशा उरांव ने किया. आयुक्त निशा उरांव ने कहा कि वर्तमान पेसा नियमावली से विकास नहीं विनाश होगा. वर्तमान पेसा कानून में ग्रामसभा का गठन गांव के लोग नहीं, बल्कि जिले के अधिकारी गठित करेंगे. योजना का चयन गांव स्तर के लोग नहीं, बल्कि जिला परिषद करेगी. गांव की ताकत तो शहर में चली गयी. पहान धर्मांतरित हो रहे हैं. लेकिन फिर भी पहान बने हुए हैं. धार्मिक जिम्मेवारी के बदले पहनई जमीन दी जाती है. लेकिन जब धर्म ही बदले जा रहे हैं, तो उनसे जमीन भी छिननी चाहिए. उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि खूंटी में महतो, पुजार, पहान हटा दिये गये हैं और सरकारी सेवक को सचिव, उपसचिव आदि बना दिया गया है. ऐसे में ये हमारी परंपरा और पहचान को बचा पायेंगे क्या. बगल के राज्य छत्तीसगढ़ में चंगई सभा का आयोजन होता था, जिसमें गांव के लोगों ने गांव में बैनर लगा दिया कि चंगई सभा में पादरी का आना मना है. श्रीमती उरांव ने बताया कि धर्म का प्रचार करना अधिकार है. लेकिन धर्मांतरण करना अधिकार नहीं है. उन्होंने वर्तमान पीढ़ी को परंपरा की आखिरी पीढ़ी बताते हुए कहा कि समाज बड़ी तेजी से बदल रहा है. पहनावा समेत अन्य चीजें बदल रही हैं, हमें सजग रहने की जरूरत है. प्रांत प्रचारक गोपाल शर्मा ने कहा कि गलत राजनीतिक गतिविधियों का परिणाम है कि समाज अलगाव की ओर बढ़ रहा है. आदिवासी समाज ही सबसे पहले अंग्रेजों की खिलाफ लड़ाई लड़ी. सीएनटी-एसपीटी एक्ट आदिवासियों के विद्रोह के कारण अंग्रेजों ने दिया न कि अंग्रेजों ने लागू किया. मौके पर दिलेश्वर पहान, मनोज दास, पुष्कर महतो, दीपक, तेजू महतो, बादल राम, लाल साहू आदि शामिल थे.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar News Desk

यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्‍ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।

Tags

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >