दुर्जय पासवान, गुमला गुमला नगर परिषद विवाद : अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और प्रशासक आमने-सामने अध्यक्ष का आरोप : प्रशासक ने आदिवासी अध्यक्ष को बेइज्जत किया है. उसे गुमला से हटाया जाये. प्रशासक का पक्ष : अध्यक्ष अभी नयी है. उन्हें नगरपालिका के नियम कानून की जानकारी नहीं है. उपाध्यक्ष ने कहा : नप प्रशासक बात करने नहीं जानते, वे अध्यक्ष व प्रशासक को अनपढ़ समझ रहे हैं. गुमला नगर परिषद में हाल ही में हुए घटनाक्रम ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है. नगर परिषद की पहली महिला अध्यक्ष शकुंतला उरांव और उपाध्यक्ष रमेश कुमार चीनी ने प्रशासक मनीष कुमार पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है. यह विवाद नगर परिषद के कामकाज और जनता की समस्याओं के समाधान पर गंभीर सवाल खड़े करता है. विवाद की शुरुआत : 14 मार्च को नगर परिषद के चुनाव के बाद शपथ ग्रहण हुआ था. अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और वार्ड पार्षदों ने कार्यभार संभाला. मात्र 12 दिन के भीतर ही अध्यक्ष और प्रशासक आमने-सामने हो गये. 27 मार्च को रामनवमी पर्व की तैयारियों को लेकर अध्यक्ष और उपाध्यक्ष अपने कार्यालय में शहर की सफाई, पानी सप्लाई और गैस आपूर्ति पर चर्चा कर रहे थे. इसी दौरान प्रशासक को बुलाया गया. प्रशासक मनीष कुमार जैसे ही चेंबर में आये, सीधे कुर्सी पर बैठ गये और नगरपालिका के नियम-कानून पढ़ाने लगे. अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का कहना है कि उन्होंने शहर की समस्याओं पर चर्चा करने से इनकार कर दिया और कहा कि उनके पास “आलतू-फालतू” बातों के लिए समय नहीं है. इससे माहौल गरमा गया और प्रशासक अपने कार्यालय लौट गये. अध्यक्ष का आरोप अध्यक्ष शकुंतला उरांव ने कहा कि प्रशासक ने आदिवासी महिला होने के कारण उनका अपमान किया. उन्होंने बताया कि प्रशासक ने उन्हें “नयी” और “अनपढ़” समझकर नियम-कानून पढ़ाना शुरू कर दिया. अध्यक्ष का कहना है कि उन्होंने रामनवमी पर्व के दौरान जनता की समस्याओं पर ध्यान देने के लिए प्रशासक को बुलाया था, लेकिन प्रशासक ने शहर के मुद्दों पर बात करने से इनकार कर दिया. उपाध्यक्ष का आरोप उपाध्यक्ष रमेश कुमार चीनी ने कहा कि प्रशासक का रवैया जनता विरोधी है. उन्होंने कहा कि प्रशासक ने साफ शब्दों में कहा कि वे केवल एक दिन बोर्ड की बैठक में भाग लेंगे, बाकी 29 दिन सरकार के काम के लिए हैं. जनता के मुद्दों को देखने की जिम्मेदारी अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की है. उपाध्यक्ष ने इसे जनता के प्रति जवाबदेही से भागना बताया. प्रशासक का पक्ष प्रशासक मनीष कुमार ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कोई बड़ा विवाद नहीं हुआ है. उनका कहना है कि अध्यक्ष नई हैं और उन्हें नगरपालिका के नियम-कानून की जानकारी नहीं है. उन्होंने केवल छह नियमों का हवाला देकर बताया कि बिना नियम के कोई काम नहीं किया जा सकता. प्रशासक ने यह भी कहा कि उन्हें चेंबर में बुलाकर बेइज्जत किया गया. शिकायत और कार्रवाई की मांग अध्यक्ष और उपाध्यक्ष ने प्रशासक के खिलाफ गुमला उपायुक्त को लिखित शिकायत दी है. साथ ही एसटी/एससी थाना में भी मामला दर्ज कराया गया है. उनका कहना है कि प्रशासक का व्यवहार आदिवासी महिला अध्यक्ष के प्रति अपमानजनक था और इस पर कार्रवाई होनी चाहिए. पृष्ठभूमि और पहले का विवाद इससे पहले भी नगर परिषद में विवाद हुआ था. बिना अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को सूचना दिये पौने दो करोड़ रुपये का सैरात का डाक कर दिया गया था. यह मामला शांत भी नहीं हुआ था कि रामनवमी पर्व की तैयारियों के बीच नया विवाद सामने आ गया.
प्रशासक ने अध्यक्ष से किया दुर्व्यवहार, मामला गरमाया
गुमला नगर परिषद में हाल ही में हुए घटनाक्रम ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है.
