गुमला से दुर्जय पासवान की रिपोर्ट
Gumla News: झारखंड के गुमला जिले के सिसई प्रखंड से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है. यहां तालाब में डूबने से एक मासूम बच्ची की मौत हो गई, जबकि बड़ी बहन की बहादुरी से छोटी बहन की जान बच गई. इस हादसे के बाद पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है.
बकरी चराने गई थीं तीनों बहनें
घटना सिसई थाना क्षेत्र के मुरगू चैलीटोली गांव की है. जानकारी के अनुसार, नीलांबर उरांव की तीनों बेटियां दिव्यांशु कुमारी (15 वर्ष), प्रीतिका कुमारी (10 वर्ष) और स्वाती कुमारी (8 वर्ष) शनिवार की दोपहर करीब तीन बजे बकरी चराने गांव के बगीचा की ओर गई थीं. भीषण गर्मी के कारण दोनों छोटी बहनों ने पास के बजरमाड़ा तालाब में नहाने का फैसला किया.
गहराई का अंदाजा नहीं, हुआ हादसा
तालाब में उतरते समय प्रीतिका और स्वाती को पानी की गहराई का अंदाजा नहीं था. देखते ही देखते दोनों गहरे पानी में डूबने लगीं. वहां मौजूद लोगों के अनुसार, कुछ ही पलों में स्थिति बेहद गंभीर हो गई और दोनों बहनें खुद को संभाल नहीं सकीं.
बड़ी बहन ने दिखाई अदम्य बहादुरी
जब बड़ी बहन दिव्यांशु कुमारी ने अपनी दोनों बहनों को डूबते देखा, तो उसने बिना समय गंवाए तालाब में छलांग लगा दी. उसने पूरी हिम्मत और साहस के साथ छोटी बहन स्वाती को पकड़कर सुरक्षित बाहर निकाल लिया. यह एक ऐसा क्षण था, जहां उसकी सूझबूझ और साहस ने एक जिंदगी बचा ली.
मंझली बहन को नहीं बचाया जा सका
हालांकि, दिव्यांशु ने पूरी कोशिश की, लेकिन तब तक मंझली बहन प्रीतिका गहरे पानी में डूब चुकी थी. काफी प्रयास के बाद उसे बाहर निकाला गया और तुरंत सदर अस्पताल गुमला ले जाया गया. वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया. इस खबर के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा.
पुलिस जांच में डूबने से मौत की पुष्टि
घटना की सूचना मिलते ही गुमला पुलिस अस्पताल पहुंची और शव का पंचनामा तैयार किया. पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, बच्ची के शरीर पर किसी प्रकार के चोट के निशान नहीं पाए गए हैं. प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि उसकी मौत पानी में डूबने से हुई है. पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया, जिसके बाद गांव में शोक की लहर दौड़ गई.
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गांव में पसरा मातम, लोगों में शोक
इस दुखद घटना के बाद मुरगू चैलीटोली गांव में हर तरफ सन्नाटा पसरा हुआ है. ग्रामीणों का कहना है कि अगर तालाब के पास सुरक्षा के इंतजाम होते या बच्चों को गहराई का अंदाजा होता, तो शायद यह हादसा टल सकता था.
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