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घाघरा के नवडीहा करंजटोली की सड़क में पसरा कीचड़, कई गांव के लोग हैं प्रभावित

नवडीहा करंजटोली से गुटुवा कोयल नदी तक सड़क कीचड़ में तब्दील हो गयी है. लोगों को आने-जाने में परेशानी हो रही है.

By Prabhat Khabar Print Desk
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घाघरा के नवडीहा करंजटोली की सड़क में पसरा कीचड़
घाघरा के नवडीहा करंजटोली की सड़क में पसरा कीचड़
प्रभात खबर.

घाघरा : प्रखंड क्षेत्र के नवडीहा करंजटोली से गुटुवा कोयल नदी तक सड़क कीचड़ में तब्दील हो गयी है. लोगों को आने-जाने में परेशानी हो रही है. करंजटोली व नवाटोली के लोगों को प्रखंड मुख्यालय जाने के लिए अतिरिक्त 12 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ रही है. क्योंकि इस सड़क पर पैदल भी चलने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. यहां बता दें कि विद्यार्थी से लेकर व्यावसायिक कार्य से जुड़े लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

इसी सड़क से होते हुए सहीजाना, लरंगो, गुट्वा, नवाटोली व चांची सहित दर्जनों गांव सड़क के कारण प्रभावित है. यह सड़क सिसई प्रखंड को जोड़ता है. इसी सड़क से होते हुए सैकड़ों की संख्या में विद्यार्थी साइकिल एवं पैदल आना-जाना करते हैं. बरसात के दिन में गड्ढे की वजह से गिरने के कारण विद्यार्थी इस सड़क का उपयोग नहीं करते हुए अतिरिक्त दूरी तय कर विद्यालय जाते हैं. गांव में डेढ़ सौ परिवार रहते हैं.

जिसमें से 50 परिवार मुर्गी पालन से जुड़े हैं. मुर्गी बड़ा होने के बाद गांव से ट्रैक्टर में लाद कर मुख्य मार्ग तक पहुंचाते हैं. सड़क खराब होने के कारण रास्ते में कई मुर्गी की मौत हो जाती है. जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है. मुखिया बांधव उरांव ने कहा कि यह सड़क काफी लंबी चौड़ी है. इस सड़क को पंचायत फंड से नहीं बनायी जा सकती. उपायुक्त, डीडीसी समेत बीडीओ को ग्राम सभा कर हस्तलिखित आवेदन दिया गया है.

सरिता उरांव ने कहा कि कई बार हम लोग सड़क बनवाने के लिए ग्रामसभा की प्रति के साथ आवेदन लिख कर बीडीओ को दिये. जिसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई. एंबुलेंस व ममता वाहन गांव तक नहीं पहुंच सकता है. रोगी व गर्भवती महिला को खाट में उठा कर मुख्य मार्ग तक लाना पड़ता है. समाजसेवी भिनेश्वर भगत ने कहा बरसात के दिनों में लोग अपने घर से नहीं निकल पा रहे हैं. किसान अपना सब्जी बाजार तक नहीं पहुंचा पा रहा हैं. बच्चे स्कूल कॉलेज नहीं जा पा रहे हैं. प्रत्येक दिन कोई ना कोई इस कीचड़ में गिरता है और फिर उसका अस्पताल में इलाज कराया जाता है. हमें सड़क पर उतर कर आंदोलन करना होगा. तभी हमारे गांव की सड़क बनेगी.

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