Jharkhand Village Story: झारखंड का ऐसा गांव जहां ग्रामीण हैं कैद, जानें क्या है इसकी बड़ी वजह

रातू गम्हरिया में 50 एवं सिफरी गांव में 40 घर है. जहां 400 लोग निवास करते हैं. दोनों गांव चारों ओर से नदी और पहाड़ से घिरा हुआ है. तीन दिशाओं से साफी नदी से घिरा हुआ है तो एक ओर पहाड़ है.

झारखंड के गुमला जिले के दो गांव के लोग अपने ही गांव में कैद हो गये हैं. वजह है पहुंच पथ का अभाव. दरअसल जिले के चैनपुर प्रखंड स्थित सिफरी और गम्हरिया गांव के लोगों के लिए बाहर निकलने का रास्ता ही नहीं है. इस वजह से लोग अपने ही गांव में कैद हो गये हैं.

बता दें कि रातू गम्हरिया में 50 एवं सिफरी गांव में 40 घर है. जहां 400 लोग निवास करते हैं. दोनों गांव चारों ओर से नदी और पहाड़ से घिरा हुआ है. तीन दिशाओं से साफी नदी से घिरा हुआ है तो एक ओर पहाड़ है. दोनों गांव के लोग गांव से निकलने के लिए ज्यादातर साफी नदी का उपयोग करते हैं. लेकिन उस नदी पर पुल ही नहीं है. गांव से बाहर निकलने के लिए लोग बहती पानी से होकर गुजरते हैं. गर्मी के दिनों में तो पानी कम होने के कारण ज्यादा दिक्कत नहीं होती है लेकिन बारिश के दिनों में पानी की धारा तेज होने के कारण कहीं आ जा नहीं सकते हैं. जिन्हें बहुत ज्यादा जरूरी है तो वो अपनी जान जोखिम डालकर नदी पार करते हैं

आजादी के बाद भी सड़क नहीं बनीं

कुछ लोग गांव से बाहर निकलने के लिए पहाड़ी का उपयोग करते हैं लेकिन पहड़ी का रास्ता बेहद जोखिम भरा है. साथ ही साथ पहड़ी वाला रास्ता से जाने पर समय भी अधिक लगता है. गांव के रहने वाले सुरजन मुंडा, रूपी देवी, सुलोचना कुजूर, फुलमईत देवी बताते हैं कि किसी काम से अगर किन्हीं को बाहर जाना पड़े तो लोगों को नदी पारकर जाना पड़ता है. उनका कहना है कि आजादी के बाद गांव में सड़क बना ही नहीं. जिस वजह से गांव का विकास थम गया है.

आंगनबाड़ी केंद्र तो है लेकिन भवन नहीं

ग्रामीण बताते हैं कि बारिश में बच्चे स्कूल नहीं जा पाते हैं क्योंकि गांव में स्कूल तो है लेकिन शिक्षक नहीं होने के कारण वो भी बंद पड़ा है. बच्चे पड़ोस के गांव में स्कूल जाते हैं. लेकिन बरसात के मौसम में तो कोई भी अपने बच्चे को स्कूल नहीं भेजते हैं. हालांकि ग्रामीणों ने गुमला के उपायुक्त को अपनी समस्या से अवगत करा दिया है.

नदी में बहती हुई पानी से होकर गुजरते हैं. तब कहीं जाकर नदी पार करते हैं, लेकिन अभी नदी में अधिक बरसानी पानी बह रही है. जिस कारण बहुत जरूरी काम से ही गांव के लोग जान जोखिम में डालकर नदी पारकर अपने गांव से पंचायत मुख्यालय अथवा प्रखंड मुख्यालय जाते हैं.

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लेखक के बारे में

Author: Sameer Oraon

समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.

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