नेपाली, चाइनीज या दीकू कहकर किसी को अपमानित करना सामाजिक एकता के लिए खतरा: शम्मी

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के गुमला विभाग के प्रचारक शम्मी ने सभी भारतीयों से अपील की है कि वे किसी को भी उनकी भाषा, क्षेत्र या पहनावे के आधार पर अपमानित न करें. उन्होंने कहा कि विविधता भारत की पहचान है और सभी को एक राष्ट्र का हिस्सा मानना ​​आवश्यक है.

गुमलाः राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के गुमला विभाग के प्रचारक शम्मी ने कहा कि भारत में किसी भी भारतीय को नेपाली, चाइनीज, दीकू अथवा बाहरी कहकर अपमानित करना उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले लोगों की भाषा, खान-पान, पहनावा और रहन-सहन में भिन्नता हो सकती है, लेकिन सभी भारतीय एक ही राष्ट्र और समाज का हिस्सा हैं. उन्होंने लोगों से क्षेत्र, भाषा या पहचान के आधार पर किसी भी भारतीय को अपमानित नहीं करने की अपील की.

विविधता भारत की पहचान, सभी एक राष्ट्र का हिस्सा

शम्मी ने कहा कि उत्तर, दक्षिण, पूरब और पश्चिम का पूरा भूभाग भारत है और देश की विविधता ही उसकी सबसे बड़ी विशेषता है. महाकुंभ, चार धाम, ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ जैसी धार्मिक परंपराओं के साथ दुर्गापूजा, दीपावली, सोहराय, सरहुल और करम जैसे पर्व भी लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने का काम करते हैं. उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश के किसी व्यक्ति को चाइनीज कहना, दार्जिलिंग या सिक्किम के व्यक्ति को नेपाली कहकर चिढ़ाना अथवा झारखंड, बिहार और बंगाल में एक-दूसरे को दीकू या बाहरी कहना सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता को कमजोर करता है.

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आपसी सद्भाव और राष्ट्रीय एकता मजबूत करने पर जोर

उन्होंने कहा कि भारत के भीतर एक राज्य से दूसरे राज्य में जाकर बसना देश के ही एक हिस्से से दूसरे हिस्से में जाना है. ऐसे लोगों को बाहरी कहना उचित नहीं है. समाज में आपसी सद्भाव और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किये जा रहे हैं. विद्यार्थियों के बीच राज्यों की सांस्कृतिक समझ बढ़ाने के साथ नवोदय विद्यालयों, राष्ट्रीय कैडेट कोर और सेना जैसी संस्थाओं के माध्यम से देश के अलग-अलग हिस्सों के लोगों को एक-दूसरे से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है.

कानून के दायरे में हो अवैध घुसपैठ पर कार्रवाई

शम्मी ने कहा कि देश की सुरक्षा और एकता के लिए अवैध घुसपैठ के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई आवश्यक है. साथ ही राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए समाज में आपसी सद्भाव और भाईचारा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति लोगों को जोड़ने और सभी के कल्याण की भावना सिखाती है. इसलिए प्रत्येक नागरिक को संकल्प लेना चाहिए कि वह किसी भारतीय को नेपाली, चाइनीज, दीकू या बाहरी कहकर अपमानित नहीं करेगा और देश की एकता एवं अखंडता को मजबूत करने में अपना योगदान देगा.


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लेखक के बारे में

By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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