गुमला. गुमला जिले की उर्मी पंचायत में रहने वाली बीजो देवी ममता, करुणा और सेवा की अनूठी मिसाल बन गयी हैं. पिछले पांच वर्षों से वे अपने सेवा आश्रम के माध्यम से उन बच्चों का सहारा बनी हुई हैं, जिनका इस दुनिया में कोई नहीं है. बीजो देवी की यह सेवा यात्रा 2021 में औपचारिक रूप से संस्था के रूप में शुरू हुई, लेकिन इसकी नींव कोरोना काल की त्रासदी के दौरान ही पड़ गयी थी. उस कठिन दौर में जब लोग अपनों से भी दूरी बना रहे थे, तब बीजो देवी ने लावारिस व असहाय बच्चों को अपना कर उन्हें नया जीवन दिया. भावुक होकर बीजो देवी बताती हैं कि सड़क व गांवों में बेसहारा हालत में बच्चों को देख कर उनका कलेजा कांप उठता था. वे कहती हैं कि धन से बड़ा धनी मन होना जरूरी है बेटा. संसाधनों की कमी के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. कई बार खुद आधा पेट खाकर बच्चों को भोजन कराया. अभाव के दिनों में बच्चों को माड़-भात खिला कर पाला और खेतों से साग तोड़ कर सब्जी बना कर खिलायी. इधर बीजो देवी के इस पुनीत कार्य में उनके बड़े बेटे सुनील ने भी त्याग और सेवा की मिसाल पेश की है. कोरोना काल में वे कोलकाता में नौकरी कर रहे थे, लेकिन मां का संघर्ष और बच्चों के प्रति समर्पण देख कर उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और घर लौट कर पूरी तरह इस मिशन से जुड़ गये.
एक-दो बच्चों से शुरू हुआ सफर, अब 52 बच्चों का परिवार
बीजो देवी ने शुरुआत एक-दो बच्चों की देखभाल से की थी, लेकिन आज उनके आश्रम में 52 बच्चे रह रहे हैं. इनमें केवल गुमला ही नहीं, बल्कि असम तक के बच्चे शामिल हैं. इन बच्चों के लिए बीजो देवी केवल संरक्षक नहीं, बल्कि मां का रूप बन चुकी हैं.
अब समाज भी बढ़ा रहा मदद का हाथ
लगातार पांच वर्षों की निस्वार्थ सेवा के बाद अब गुमला के समाजसेवी और स्थानीय लोग भी इस आश्रम की मदद के लिए आगे आने लगे हैं. धीरे-धीरे मिल रहे सामाजिक सहयोग से बच्चों के बेहतर भविष्य की उम्मीदें मजबूत हुई हैं.
