गुमला में जल संरक्षण से लहलहा उठे खेत

जगरनाथ पासवान गुमला : गुमला से 15 किमी दूर एक उग्रवाद प्रभावित गांव है, पनसो. कभी सिंचाई के आभाव में यहां के खेत में दरारें पड़ जाती थीं. किसान पलायन को मजबूर थे. लेकिन, विकास भारती बिशुनपुर के एक अभियान ने गांव की तसवीर ही बदल दी. आज गांव में चारों ओर हरियाली है. 250 […]

जगरनाथ पासवान
गुमला : गुमला से 15 किमी दूर एक उग्रवाद प्रभावित गांव है, पनसो. कभी सिंचाई के आभाव में यहां के खेत में दरारें पड़ जाती थीं. किसान पलायन को मजबूर थे. लेकिन, विकास भारती बिशुनपुर के एक अभियान ने गांव की तसवीर ही बदल दी. आज गांव में चारों ओर हरियाली है.
250 एकड़ में केला, आम, धान, सरसो, तीसी के अलावा मटर की खेती हो रही है. लोगों को अच्छी आमदनी हो रही है. यह सब संभव हुआ ‘बोरा बांध अभियान’ से. किसानों ने श्रमदान किया. पनसो गांव के अड़िया नदी में बोरा बांध बना गांव के पानी को गांव में ही रोका. छोटी नहर बना कर नदी के पानी को खेतों तक पहुंचाया. असर यह हुआ कि बंजर खेतों में फसल लहलहाने लगे.
सुखाड़ की मार झेल रहे किसानों ने विकास भारती बिशुनपुर के सचिव पद्मश्री अशोक भगत से मुलाकात की. अपनी समस्या उनके समक्ष रखी. भगत ने किसानों को सहयोग का आश्वासन दिया.
वह गांव गये. गांव की भौगोलिक बनावट और पानी के स्रोत की जानकारी ली. उन्होंने किसानों को बोरा खरीद कर दिये. किसानों को जागरूक करना शुरू किया. उन्हें बताया कि गांव की नदी में यदि बोरा बांध बना कर पानी को रोका जाये, तो उनकी खेतों तक पानी पहुंच सकता है. किसानों को उनकी बात समझ आ गयी. फिर क्या था, किसानों ने श्रमदान कर गांव में बोरा बांध बनाना शुरू कर दिया. पानी रुका और खेतों का जी भी तर हो गया. नतीजा यह हुआ कि बंजर भूमि उपजाऊ बन गयी. खेतों की प्यास बुझने के साथ-साथ मवेशियों के पीने के पानी का भी इंतजाम हो गया.
पांच नदियों पर बांध बनाया : पनसो में बोरा बांध की सफलता से उत्साहित होकर विकास भारती बिशुनपुर ने जल संरक्षण के तहत गुमला, घाघरा, बिशुनपुर व सिसई प्रखंड की पांच नदियों पर बोरा बांध बनाया. करमटोली, शिवराजपुर, पनसो, पंडरानी व बरिसा गांव में इस बांध के जरिये पानी को रोका गया. गुमला, लोहरदगा, लातेहार और रांची में 70 नदी-नालों पर बोरा बांध बनाये गये हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि हर जगह यह काम श्रमदान से हो रहा है.
बोरा बांध बनाने में शामिल लोग पनसो गांव में बांध निर्माण में महेंद्र भगत, भिखारी भगत, पहना भगत, रति भगत, बिफैई भगत, पती भगत, चारों भगत, बलि भगत, नारायण भगत, करमा भगत, गया भगत, रंथा भगत, एतवा भगत, बही भगत, बंधन भगत, लोहरा भगत, करम शीला, पहाड़ मुनी, राजमुनी, सरस्वती, बिरसमुनी, गांगी, मुनी देवी, महरंगीला देवी, एतमईन देपी, सारिका, मिला, सोनी देवी, बुद्धमनिया देवी, संपति देवी, पोको, सहबालिका, पंचोला, तेबो, सुबली, सोना, गंदुवा, सुको, रोपनी, रतनी, सहोदरी, कोसी समेत 100 से अधिक किसान शामिल थे.

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