पीएलएफआइ के गढ़ में घुसी पुलिस

कार्रवाई. गुड़ाम नरसंहार के बाद पुलिस ने शुरू किया अभियान बसिया के गुड़ाम में हुए नरसंहार के बाद पुलिस ने पीएलएफआइ के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया है. डीआइजी व एसपी के साथ कई वरीय पुलिस पदाधिकारी इस अभियान में शामिल हैं. बसिया, कामडारा व बानो के बॉर्डर में अभियान चल रहा है. दुर्जय पासवान […]

कार्रवाई. गुड़ाम नरसंहार के बाद पुलिस ने शुरू किया अभियान
बसिया के गुड़ाम में हुए नरसंहार के बाद पुलिस ने पीएलएफआइ के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया है. डीआइजी व एसपी के साथ कई वरीय पुलिस पदाधिकारी इस अभियान में शामिल हैं. बसिया, कामडारा व बानो के बॉर्डर में अभियान चल रहा है.
दुर्जय पासवान
गुमला : बसिया थाना क्षेत्र के गुड़ाम मसरीबेड़ा में नरसंहार की घटना के बाद गुमला पुलिस ने पीएलएफआइ उग्रवादियों के खिलाफ ऑपरेशन शुरू किया है. शुक्रवार से पुलिस का मिशन पीएलएफआइ शुरू हुआ है. इस अभियान का नेतृत्व स्वयं रांची के डीआइजी आरके धान व गुमला एसपी भीमसेन टुटी कर रहे हैं. इसमें गुमला जिला के बसिया, पालकोट, कामडारा, भरनो, सिमडेगा के बानो व खूंटी जिला के तोरपा थाना की पुलिस है. साथ में सीआरपीएफ 218 बटालियन व आइआरबी के जवान हैं. पीएलएफआइ का गढ़ माने जानेवाले इलाके में पुलिस घुसी हुई है. पुलिस पैदल ही अभियान चला रही है.
पुलिस सूत्रों के अनुसार, बसिया व बानो के बॉर्डर इलाके में पीएलएफआइ के उग्रवादी छिपे हुए हैं. पुलिस उन इलाकों की घेराबंदी कर छापामारी अभियान चला रही है. हालांकि समाचार लिखे जाने तक पुलिस को कोई सफलता नहीं मिली है, परंतु पुलिस कड़ी धूप में जंगलों व पहाड़ों में उग्रवादियों को खोज रहे हैं.
पीएलएफआइ सुप्रीमो दिनेश गोप समेत नौ पर केस दर्ज
बसिया थाना क्षेत्र के गुड़ाम मसरीबेड़ा में गुरुवार को दिनदहाड़े हुए चार लोगों की हत्या के मामले में थाना में पीएलएफआई उग्रवादियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है. इसमें नौ लोगों को नामजद व सात-आठ अज्ञात उग्रवादियों के खिलाफ केस किया गया है.
सुषमा देवी ने प्राथमिकी दर्ज करायी है, जिसमें उसने पीएलएफआइ के सुप्रीमो दिनेश गोप के साथ सबजोनल कमांडर गुज्जू गोप, मार्टिन केरकेट्टा, एरिया कमांडर बादल लोहरा, गणेश शंकर, पारस राम, सहदेव राम, मटकू सिंह व मिट्ठू सिंह को आरोपी बनाया है. कहा गया है कि गुड़ाम मसरीबेड़ा के समीप सड़क का निर्माण हो रहा था, तभी हथियारबंद उग्रवादी पहुंचे गोलियां बरसानी शुरू कर दी, जिससे मुंशी व तीन मजदूरों की मौत हो गयी.
शिकस्त के बाद उग्रवादियों ने किया पलटवार
24 दिसंबर 2014 को कामडारा थाना क्षेत्र के मुरगीकोना में पीएलएफआइ के उग्रवादियों ने सात बेकसूर लोगों की हत्या कर दी थी. उस समय झारखंड राज्य की पुलिस ने उग्रवादियों के खिलाफ बड़ा ऑपरेशन शुरू किया था. इसके बाद पुलिस को लगातार सफलता मिली थी.
एक साल में पुलिस ने 32 पीएलएफआइ उग्रवादियों को पकड़ा था़ 27 बड़े हथियार व 119 पीस गोली भी बरामद की थी. 14 जून 2015 को कामडारा से पीएलएफआइ के सबजोनल कमांडर अजरुन राम, एरिया कमांडर मेचो उर्फ अमृत भगत, सदस्य धर्मदेव मांझी व प्रीतम लोहरा को गिरफ्तार किया गया था़ वहीं, तीन अगस्त, 2015 को कामडारा से ही पीएलएफआइ के कोड़को उर्फ खान व संजीत होरो पकड़ा गया था.
12 अक्तूबर 2015 को बसिया के द्वारसेनी से एरिया कमांडर सन्नी मुंडा व कृष्णा गोप पकड़ा गया था. वर्ष 2015 के बाद 2016 में गुड़ाम नरसंहार के बाद झारखंड पुलिस ने पीएलएफआइ उग्रवादियों के खिलाफ दूसरा सबसे बड़ा ऑपरेशन शुरू किया है. इसमें काफी संख्या में पुलिस बल लगाया गया है. वहीं पीएलएफआइ उग्रवादियों ने वर्ष 2015 में मिली शिकस्त का वर्ष 2016 में गुड़ाम नरसंहार की घटना को अंजाम देकर पुलिस को चुनौती देते हुए पलटवार किया है.
सूचना पर क्यों नहीं की कार्रवाई?
यहां बड़ा सवाल है. पुलिस को सूचना थी कि तीन दिन से उग्रवादी क्षेत्र में भ्रमणशील हैं. इसके बाद भी पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गयी. यहां तक कि स्थानीय थानेदार व इंस्पेक्टर द्वारा वरीय पुलिस पदाधिकारी को भी इसकी सूचना देना मुनासिब नहीं समझा गया. बताया जा रहा है कि कई लोगों ने पुलिस को गुप्त सूचना दी थी. फोन भी किया. मुलाकात कर भी जानकारी दी, लेकिन, पुलिस ने मामले को हल्के में लिया़ कहा जा रहा है कि अगर समय रहते पुलिस कार्रवाई करती, तो ऐसी स्थिति नहीं आती़
कहां से आये एके-47 व एसएलआर!
गुड़ाम नरसंहार में उग्रवादियों ने एके-47, एसएलआर व इंसास रायफल का उपयोग किया है. अब सवाल यह है कि ये हथियार उग्रवादियों के पास कैसे पहुंचे. वह भी 15 दिन पहले पीएलएफआइ में शामिल हुए बादल लोहरा के दस्ते में यह हथियार है. पुलिस मामले की जांच कर रही है. पुलिस को शक क्षेत्र में सड़क, पुल, पुलिया बना रहे ठेकेदारों पर है, क्योंकि उग्रवादी लेवी की मांग करते हैं. ठेकेदार डर से लेवी पहुंचाते हैं. उसी लेवी की रकम से उग्रवादी इतने बड़े हथियार खरीद कर आतंक फैला रहे हैं.
मोबाइल कवरेज एरिया से बाहर, स्विच ऑफ
पीएलएफआइ के गढ़ में पुलिस के घुसने के बाद सभी पुलिस अधिकारियों का मोबाइल फोन स्विच ऑफ हो गया है. वहीं कुछ पदाधिकारियों का मोबाइल नंबर कवरेज एरिया से बाहर बताया जा रहा है. इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि पुलिस पीएलएफआई को खोजने के लिए जंगल के काफी अंदर तक घुस गयी है.

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