गुमला : पालकोट प्रखंड में सतखारी गांव है. यहां के किसान बासिल एक्का ने अपने खेत में तालाब खोदा है, लेकिन दो साल से अच्छी बारिश नहीं होने के कारण तालाब में पानी जमा नहीं हो सका. मजबूरन किसान उसी तालाब के अंदर खेती करता है. बासिल ने कहा : एक एकड़ खेत है, जहां सालों भर खेती करते हैं. तालाब में पानी जमा नहीं होने पर एक कुआं खोदा है, उसी कुआं से खेती करते हैं. बगल में सतखारी डैम है, जो 50 वर्षों से बेकार पड़ा है. डैम का कोई उपयोग नहीं है. पानी जमा नहीं होता है. डैम भी क्षतिग्रस्त हो गया है. अगर सिंचाई के लिए पानी मिले, तो सतखारी के 150 किसान आराम से खेती कर सकेंगे.
11.65 किमी लंबी नहर है
जल संसाधन विभाग के एसडीओ श्रीकेश सिंकू व अश्विनी कुमार ने बताया : डैम के नहर की लंबाई 11.65 किमी है, लेकिन अभी पांच किमी की दूरी तक ही नहर ठीक है. पांच किमी तक पानी पहुंच रहा है.
शेष हिस्सों में नहर की मरम्मत की दरकार है. इस वर्ष किसानों ने 1000 हेक्टेयर खेत में खरीफ फसल की खेती की. वहीं छह सौ हेक्टेयर खेत में रबी फसल की खेती की है. जहां तक पानी पहुंच रहा है, किसान खेती कर रहे हैं. 36 स्कावयर किमी तक डैम फैला है. यह डैम दक्षिणी कोयल नदी की सहायक नदी खखरा नदी में बना है. अगर केनाल से पानी पहुंचे, तो 2305 हेक्टेयर खेत को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा.
