गुमला : दिल्ली में तीन स्थानों पर काम के बदले शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना का शिकार होने के बाद दो लड़कियां दिल्ली से भाग कर बुधवार को गुमला पहुंची. दोनों सीडब्ल्यूसी के समक्ष प्रस्तुत होकर उनके साथ दिल्ली में हुई घटनाओं की जानकारी दी.
इनमें एक लड़की चैनपुर प्रखंड के कुरूमगढ़ गांव की विपत कुमारी व गोविंदपुर की दीपा कुमारी (बदला हुआ नाम) हैं. विपत को गुमला शहर के करमटोली में रहनेवाले उसके ही चचेरे भाई सुमन उरांव ने एक महिला दलाल आरती के माध्यम से दिल्ली भिजवाया था. विपत वर्ष 2014 के दिसंबर माह में आरती के साथ दिल्ली गयी थी.
दिल्ली में आरती ने विपत को एक एजेंसी को बेच दिया. इसके बाद उसने वर्ष 2014 से लेकर वर्ष 2016 के जनवरी प्रथम सप्ताह तक तीन स्थानों पर काम किया. जहां उसे काम के बदले शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना मिली. उसने बताया कि दादी के कहने पर कुरूमगढ़ से अपने चचेरे भाई सुमन उरांव के पास चावल पहुंचाने के लिए करमटोली आयी थी.
जहां सुमन ने विपत को महिला दलाल आरती के साथ दिल्ली भेज दिया. दिल्ली पहुंचने के बाद शुरू में तीन माह तक दिल्ली में एक स्थान पर काम की. तीन महीने तक काम करने के बाद पैसा मांगी तो मकान मालिक ने मारपीट की. बताया कि काम तुम्हारा पैसा एजेंसीवाले ले गये. इसके बाद विपत को रानीबाग में राजमोहन उत्तरा के यहां काम करने के लिए भेज दिया गया. पैसे की मांग करने पर यहां भी विपत के साथ मारपीट की गयी.
इसके बाद उसने आरती से संपर्क किया. इस पर आरती उसे नोएडा ले गयी और पंकज सिंह के यहां काम करने के लिए छोड़ आयी. यहीं विपत की मुलाकात गोविंदपुर की दीपिका से हुई. यहां भी उनके के साथ मारपीट किया जाने लगा. आये दिन मारपीट से तंग आकर दोनों दिल्ली से भाग कर बोकारो आयी और वहां से सीधे गुमला आने के बाद अपनी भाई को ढूंढते हुए करमटोली पहुंची. जहां दोनों की मुलाकात एक समाजसेवी वीरेंद्र भगत से हुई. इसके बाद वीरेंद्र ने दोनों को सीडब्ल्यूसी में पहुंचा दिया.
