– प्रसव पीड़ा के समय बुलाने के बाद भी नहीं आयी नर्स
सदर अस्पताल गुमला की लापरवाही फिर सामने आयी. महिला डॉक्टर के ड्यूटी से गायब रहने के कारण प्रसव के 20 घंटे बाद एक शिशु की मौत हो गयी. इससे आक्रोशित परिजनों ने आधा घंटे तक हंगामा किया. अधिकारियों के समझाने के बाद मामला शांत हुआ. जानकारी के अनुसार रायडीह प्रखंड के बिरकेरा गांव की नेहा देवी के शिशु की मौत सदर अस्पताल के चिकित्सकों की लापरवाही के कारण हो गयी. अब अस्पताल प्रबंधन गलत रिपोर्ट बना कर अपना पल्ला झाड़ने में लगा है.
नेहा ने कहा कि आठ दिसंबर की रात में प्रसव कक्ष में डॉ अनुराधा कश्यप की ड्यूटी थी. लेकिन वह अपनी ड्यूटी पर नहीं थी. उसे प्रसव के लिए सदर अस्पताल में आठ दिसंबर की दोपहर को भरती कराया गया था. नौ दिसंबर की अहले सुबह ढ़ाई बजे प्रसव हुआ. नेहा ने एक पुत्र को जन्म दिया. जन्म के बाद उसका पुत्र व मां दोनों स्वस्थ थे. शिशु के जन्म के बाद उसे थोड़ी सी उल्टी हुई थी.
सुबह में चिकित्सक कृष्णा प्रसाद के पास परिजनों ने नवजात को दिखाया. नवजात को चिकित्सक ने दवा दी. उसी रात 10.30 बजे उसके पुत्र की मौत हो गयी. नेहा ने बताया कि मैं जब आठ दिसंबर को एडमिट हुई थी. मुझे रात 11 बजे से प्रसव दर्द हो रहा था. मेरे परिजन दर्द होने पर नर्सो व महिला चिकित्सक को बुलाने गयी, तो नर्सो ने उन्हें डांटते हुए बोला कि डॉक्टर नहीं है और अभी प्रसव के लिए मुंह नहीं बना है. समय लगेगा.
लेकिन इसी बीच बिना नर्स व चिकित्सक के मैंने नॉर्मल रूप से एक बच्चे को जन्म दिया. जन्म के बाद हम दोनों स्वस्थ थे. अगर समय पर मेरे नवजात बच्चे को डॉक्टर देखते तो उसकी जान बच सकती थी.
