विवेक चंद्र
16 फरवरी 2019 को पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने की थी घोषणा
सीएम ने स्वयं और अपने मंत्रियों के एक माह का वेतन देने की बात कही थी
कैबिनेट ने अफसरों व कर्मियों का एक दिन का वेतन देने का किया था फैसला
घोषणा के एक साल हो गये, अब तक शहीदों के परिवार को राशि नहीं मिली
रांची : 14 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकवादी हमले में 44 जवान शहीद हो गये थे. शहीदों में झारखंड के जवान भी थे. इस घटना के बाद पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने 16 फरवरी 2019 को स्वयं और अपने मंत्रियों के एक माह का वेतन शहीदों के परिवार को देने की घोषणा की थी. बाद में हुई कैबिनेट की बैठक में भी राज्य सरकार के अधिकारियों और कर्मचारियों का एक दिन का वेतन शहीदों की सहायता के लिए देने का फैसला किया गया था. लेकिन, घोषणा के एक साल बाद भी मुख्यमंत्री, मंत्रियों या सरकारी अधिकारियों व कर्मचारियों की ओर से शहीदों के परिजनों तक सहायता राशि नहीं पहुंची है. अब तक राज्य सरकार द्वारा न तो किसी का वेतन काटा गया है, न ही शहीदों के नाम राशि जमा करने की कोई पहल की गयी है.
वित्त ने की थी आपत्ति : पुलवामा के शहीदों के लिए झारखंड सरकार के मंत्रिमंडल का एक माह और अधिकारियों व कर्मचारियों के एक दिन का वेतन समर्पित करने का फैसला कैबिनेट की बैठक में लिया गया था. फैसले के आलोक में शहीदों के परिजनों तक सहायता राशि पहुंचाने के लिए वित्त विभाग को सीधे कोषागार से वेतन की कटौती का प्रस्ताव दिया गया था. लेकिन, वित्त विभाग ने इस पर आपत्ति करते हुए सीधे कोषागार से राशि की कटौती करने को नियम संगत नहीं बताया था. इसके बाद अधिकारियों और कर्मचारियों के संघों द्वारा राशि जमा करने की लेकर चर्चा की गयी. हालांकि, समय बीतने के साथ मामला ठंडे बस्ते में चला गया.
सीसीएल और बीसीसीएल ने भी पैसा नहीं दिया
सीसीएल और बीसीसीएल ने भी शहीदों के परिजनों को सहायता राशि नहीं दी है. बसिया के विजय सोरेंग के पुलवामा में शहीद होने के बाद बीसीसीएल व सीसीएल ने सभी कर्मचारियों का एक-एक दिन का वेतन देने की घोषणा की थी. फरवरी माह में ही बीसीसीएल व सीसीएल के सभी कर्मियों का एक-एक दिन का वेतन काट लिया गया था. यह पैसा पिछले साल भर से बैंक में पड़ा है, लेकिन शहीद के परिजनों को राशि देने की पहल अब तक नहीं की गयी है.
पिता ने कहा : शहीद बेटे के नाम पर की गयी राजनीति का मुझे दुख है
दुर्जय पासवान
गुमला : गुमला जिला अंतर्गत बसिया प्रखंड के फरसामा गांव के निवासी विजय सोरेंग भी 14 फरवरी 2019 को पुलवामा में हुए फिदायीन हमले में शहीद हो गये थे. शहीद विजय के पिता बिशु सोरेंग व भाई संजय सोरेंग कहते हैं कि जब रघुवर दास मुख्यमंत्री थे, उन्होंने मदद की घोषणा की थी. परंतु न तो उन्होंने कोई मदद की और न ही उनके कोई मंत्री सहायता के लिए आगे आये. सरकार की ओर से 10 लाख रुपये शहीद की पत्नी को मिले हैं.
लेकिन, उसके लिए भी मुझे पूर्व मुख्यमंत्री से मिल कर गुहार लगानी पड़ी थी. शहीद के पिता कहते हैं कि मुझे शहीद विजय सोरेंग के नाम पर की गयी राजनीति का दुख है. वोट बैंक के लिए शहीद के नाम का इस्तेमाल किया गया. सरकार की घोषणा केवल मीडिया तक ही सीमित रही. कभी शहीद के परिवार का हाल मालूम करने का प्रयास नहीं किया गया. पुलवामा घटना के बाद फिल्मी दुनिया के हीरो, हीरोइनों ने भी 40 शहीदों के परिवार को सहायता देने की घोषणा की थी. कई संस्थाओं द्वारा प्रधानमंत्री राहत कोष में राशि जमा भी करायी गयी है. परंतु, शहीद विजय सोरेंग के परिवार को अब तक उसमें से एक रुपया भी नहीं मिला है.
