अमित कुमार राज
कुड़ू : कुड़ू वन विभाग के पास शवदाह के लिए लकड़ी नहीं है. शव जलाने के लिए कुड़ू के ग्रामीणों को मंहगे दामों में बाजार से लकड़ी खरीदनी पड़ रहा है. साथ ही शव जलाने के लिए लकड़ी व्यवस्था करने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. हैरानी की बात है कि लकड़ी तस्करों से पकड़े गये लकड़ी सड़ कर समाप्त हो जा रहा है, कारण बताया जा रहा है कि न्यायालय के आदेश के बाद ही जब्त लकड़ी को बेचा जा सकता है. पूरे मामले में जनप्रतिनिधि पूरी तरह से चुप्पी साधे हैं. बताया जाता है कि प्रखंड में 14 पंचायत है.
अमूमन प्रतिदिन किसी ना किसी बीमारी या हादसों में एक-दो ग्रामीणों की मौत हो जाती है. शव जलाने के लिए दूर-दूर से ग्रामीण लकड़ी खरीदने कुड़ू आते हैं. बताया जाता है कि पांच वर्ष पहले वन विभाग के अधीन खनिज विकास निगम के अधीन लकड़ी का डिपो चलता था . शव जलाने के लिए दो रुपये किलो के हिसाब से लकड़ी मिल जाती थी, लेकिन कुड़ू से डिपो को हटा दिया गया. नतीजा लकड़ी मिल नहीं रही है . बाजार में एक बोझा लकड़ी का दाम बीस से 25 रुपया है. प्रति किलो पांच से छह रुपया पड़ता है.
सबसे ज्यादा परेशानी गरीब परिवार को होती है. उन्हें लकड़ी व्यवस्था करने मे भारी परेशानी होती है. चार दिन पहले प्रखंड में एक की मौत हो गयी थी, परिजनों को लकड़ी खरीदने कुड़ू आना पड़ा था. कुड़ू से लकड़ी खरीद कर ले गये, तब जाकर शव का अंतिम संस्कार किया गया .
बताया जाता है कि पिछले पांच साल के भीतर वन विभाग ने जंगलो से लकड़ी लाते हुए, अवैध वन कटाई कर जमा किये गये चार से पांच ट्रक लकड़ी कुड़ू वन विभाग के पास बेकार पड़ा सड़ रहा है. जब्त लकड़ी न्यायालय के अधीन है व न्यायालय आदेश पर नीलामी या फिर बेची जा सकती है वन विभाग ने सड़ रहे लकड़ी को बेचने के प्रति कभी रूचि नही दिखायी है. इस संबंध में कुडू़ वासियों ने वन विभाग व जिला प्रशासन से मांग की है कि कुड़ू में पहले की भांति डिपो चालू कराया जाये व शव जलाने के लिए लकड़ी व्यवस्था की जाये.
