जगरनाथ
गुमला : रायडीह प्रखंड के सिलम में स्थित कल्याण गुरुकुल न केवल जिले के पढ़े-लिखे युवकों को बारबेंडर, सेंटरिंग और सरिया फीटर का प्रशिक्षण देकर रोजगार उपलब्ध करा रहा है, बल्कि समाज की मुख्यधारा से भटक चुके युवकों को भी समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का काम कर रहा है.
इसका उदाहरण गुमला प्रखंड के डुमरडीह गांव का शंकर उरांव है. शंकर उरांव कभी अापराधिक गिरोह का सक्रिय सदस्य हुआ करता था. लेवी मांगने के आरोप में शंकर जेल की सजा भी काट चुका है. वर्तमान में शंकर कल्याण गुरुकुल के माध्यम से समाज की मुख्यधारा से जुड़ गया है. शंकर के जीवन को एक लक्ष्य मिला है और वह उस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है. प्रभात खबर प्रतिनिधि से बातचीत के क्रम में शंकर ने बताया कि वह गुमला में सक्रिय एक अापराधिक गिरोह का सदस्य था.
लेवी मांगने के आरोप में वह जेल की सजा काट चुका है. सिलम स्थित बालगृह में था. इसी दौरान गणतंत्र दिवस के झंडोत्तोलन कार्यक्रम में कल्याण गुरुकुल के प्राचार्य दयाशंकर सिंह से मुलाकात हुई. उस एक ही मुलाकात में शंकर ने जीवन के मतलब को समझा और जेल से छूटने के बाद शंकर ने दयाशंकर सिंह से मुलाकात की.
दयाशंकर ने शंकर का नामांकन गुरुकुल में किया और शंकर के हाथ में सेटरिंग का हुनर देते हुए एक हुनरमंद इनसान बनाया. शंकर ने बताया कि गुरुकुल में सेटरिंग का प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद गुरुकुल के माध्यम से ही सुपरवाइजर के रूप में उसका प्लेसमेंट सापोरजी पालोनजी कंपनी में किया गया है. जहां वह स्वयं सेटरिंग का काम करेगा और अपनी देखरेख में 57 युवकों से काम करायेगा.
