चांदा और समदा गांव के बीच सुजान कित्ता नदी पर बना पुल वर्षों से दुर्घटना का खतरा पैदा कर रहा है. वर्ष 2014 में इस पुल का निर्माण ग्रामीणों के बेहतर आवागमन के लिए किया गया था. हालांकि, निर्माण कार्य के समय विभागीय नक्शे के अनुसार तिरछा एप्रोच पथ उल्टी दिशा में तैयार किया गया, जिससे आज तक इस पुल से बड़े वाहनों का परिचालन संभव नहीं हो पाया. एप्रोच पथ पर घुमावदार मोड़ होने के कारण बड़े वाहन इस मार्ग से गुजर नहीं सकते. पुल के बाहरी हिस्से के दोनों तरफ के बॉक्स पूरी तरह दब चुके हैं और ऊपर से नदी का तल दिखाई देता है. विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कोई दोपहिया वाहन चालक अनजाने में पुल पार करने में कोई गलती करता है तो वह सीधे नदी में गिर सकता है. इस मामले पर 7 जनवरी को प्रभात खबर ने ठाकुरगंगटी में घुमावदार एप्रोच पथ और टूटा पुल बना जानलेवा शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था. इसके बाद अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया और जांच दल गठित किया. जांच दल में ठाकुरगंगटी बीडीओ विजय कुमार मंडल और कनिष्ठ अभियंता निरंजन कुमार शामिल थे. बीडीओ विजय कुमार मंडल ने बताया कि निर्माण कार्य के समय पुल का निर्माण गलत दिशा में कराया गया, जो आवागमन मार्ग से बिल्कुल अलग है. पुल पर लगभग 90 डिग्री का कोण होने के कारण बड़े वाहनों का परिचालन असंभव है. उन्होंने यह भी कहा कि संवेदक ने बॉक्स का कार्य गुणवत्ता के अनुरूप नहीं किया, जिसके कारण ऊपर से नदी का तल दिखाई देता है और यह पुल वर्तमान में गंभीर दुर्घटना का खतरा उत्पन्न कर रहा है. बीडीओ ने आश्वासन दिया कि वरीय पदाधिकारी के निर्देश पर पूरी जांच रिपोर्ट सौंपी जाएगी और इसके आधार पर पुल की मरम्मत कराई जाएगी, ताकि क्षेत्र में आवागमन सुरक्षित हो सके. यह मार्ग भारी आबादी वाले क्षेत्रों से होकर जाता है और लोग इसे जिला मुख्यालय तथा अन्य स्थानों तक पहुंचने के लिए नियमित रूप से इस्तेमाल करते हैं. कुल मिलाकर, सुजानकित्ता नदी का यह पुल ग्रामीणों और आवागमन करने वालों के लिए जोखिम भरा साबित हो रहा है और मरम्मत के बाद ही इसका सुरक्षित उपयोग संभव हो पाएगा.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
