जन्मों की जमी काई को हटाती है सत्संग : स्वामी विश्वंभरानंद

सिमरड़ा में तीन दिवसीय संतमत सनातन धर्म सम्मेलन का भव्य शुभारंभ

सिमरड़ा गांव में शुक्रवार को तीन दिवसीय संतमत सनातन धर्म सम्मेलन का भव्य शुभारंभ हुआ. पहले दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और विद्वान संतों ने आध्यात्मिक ज्ञान एवं सत्संग की महत्ता पर प्रकाश डाला. मुख्य प्रवचनकर्ता महामंडलेश्वर आचार्य स्वामी विश्वंभरानंद जी महाराज ने जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि मानव मन पर जन्म-जन्मांतर की बुराइयों की जो परतें जम जाती हैं, उन्हें केवल सत्संग के माध्यम से ही मिटाया जा सकता है. उन्होंने अंतर्ध्यान की महत्ता बताते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति अंतर्ध्यान की गहराई में उतरना चाहता है, तो सत्संग उसकी पहली सीढ़ी है. स्वामी विश्वंभरानंद ने कहा कि भगवान बुद्ध को भी आत्मबल और बुद्धत्व प्राप्त करने के लिए साढ़े पांच सौ जन्मों की साधना करनी पड़ी थी. उन्होंने जोर देकर कहा कि सांसारिक सुखों की कामना तो हर मनुष्य करता है, लेकिन वास्तविक आध्यात्मिक सुख केवल तब प्राप्त होता है, जब मीराबाई जैसी अनन्य भक्ति और सत्संग का मेल हो. सम्मेलन में स्वामी बाल कृष्ण सुंदर शास्त्री (कुप्पाघाट), संत ओमानंद बाबा (चीनाढ़ाब), स्वामी भवेशानंद, स्वामी महानंद, स्वामी करुणानंद एवं ब्रह्मचारी डोमन बाबा ने भी अपने विचार साझा किये. मंच का सफल संचालन सत्संग प्रचारक ओम प्रकाश मंडल द्वारा किया गया. इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में अध्यक्ष नरेश मंडल, संरक्षक अरुण साह, अशोक सिंह, परमानंद मंडल, राजेश मंडल एवं अन्य सदस्य सक्रिय रहे.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By SANJEET KUMAR

SANJEET KUMAR is a contributor at Prabhat Khabar.

Tags

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >