शिक्षा व्यवस्था की बदहाली, हाजिरी बनाकर गायब हो जाते हैं शिक्षक

उत्क्रमित मध्य विद्यालय महुआरा में शिक्षा व्यवस्था चरमरायी

ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी विद्यालयों में शिक्षा का स्तर लगातार गिरता जा रहा है. इसका ताजा उदाहरण प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय महुआरा में देखने को मिला, जहां शिक्षकों की मनमानी और विभाग की उदासीनता ने बच्चों के भविष्य को अधर में डाल दिया है. विद्यालय में पठन-पाठन ठप, बच्चे खेलकूद में समय व्यतीत करते हैं. परासी-भगैया मुख्य मार्ग के समीप स्थित इस विद्यालय में करीब 360 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं, जिनमें प्रतिदिन 200 से अधिक बच्चे पढ़ने आते हैं. विडंबना यह है कि विद्यालय मात्र दो पारा शिक्षकों के भरोसे चल रहा है. स्थानीय लोगों और विद्यालय के शिक्षक सह सचिव संजय कुमार मंडल के अनुसार, पारा शिक्षक राजेश कुमार मंडल सुबह स्कूल आकर केवल हाजिरी बनाते हैं और फिर अपने निजी कार्यों के लिए चले जाते हैं. इसके बाद सैकड़ों बच्चों की जिम्मेदारी अकेले एक शिक्षक पर आ जाती है, जिससे पठन-पाठन पूरी तरह ठप रहता है और बच्चे केवल खेलकूद में समय व्यतीत करते हैं.

बीआरपी-सीआरपी की भूमिका पर उठ रहे गंभीर सवाल

शिक्षा की गुणवत्ता बनाये रखने के लिए संकुल स्तर पर बीआरपी और सीआरपी की नियुक्ति की गयी है, जिन्हें समय-समय पर निरीक्षण करना होता है. लेकिन महुआरा विद्यालय की स्थिति बताती है कि धरातल पर कोई निरीक्षण नहीं हो रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं और सरकार के लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद गरीब बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पा रही है. ग्रामीण गुस्से में कहते हैं कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर इतना गिर गया है कि इनका नाम ””””चरवाहा विद्यालय”””” रख देना चाहिए. उन्होंने चेतावनी दिया है कि शिक्षकों की इस मनमानी को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और यदि सुधार नहीं हुआ तो वे उग्र प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे.

क्या कहते हैं बीडीओ

उक्त विद्यालय से लगातार शिकायतें मिल रही हैं. मामले की जांच करायी जाएगी और दोषी के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.

-विजय कुमार मंडल (बीडीओ, ठाकुरगंगटी)

क्या कहते हैं बीपीओ

राजेश कुमार मंडल द्वारा केवल हाजिरी लगाकर गायब रहने की शिकायत मिली है. उन्हें पहले भी दो बार स्पष्टीकरण भेजा जा चुका है. अब उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई निश्चित रूप से की जाएगी. शिक्षा के नाम पर किसी भी प्रकार की खानापूर्ति बर्दाश्त नहीं की जाएगी.

-कुणाल कुमार (बीपीओ, शिक्षा विभाग)B

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Author: SANJEET KUMAR

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