प्रवासी पक्षी. बड़ी तादाद में गोड्डा व संताल में आते हैं मेहमान पक्षी

गोड्डा में पहली बार मिला ग्रीन पीजन साइबेरियन डक के नाम से जाने वाले पक्षी से परिचित हैं लोग्र बंगाल के नेचुरल पार्क में देखे जाते है ग्रीन पीजन दुर्लभ प्रजाति के इस कबूतर आम कबूतरों से काफी आर्कषक गोड्डा काॅलेज के जन्तु विभाग के प्राध्यापक प्रो. पी के वर्मा मानते है कि ग्रीन पीजन […]

गोड्डा में पहली बार मिला ग्रीन पीजन

साइबेरियन डक के नाम से जाने वाले पक्षी से परिचित हैं लोग्र
बंगाल के नेचुरल पार्क में देखे जाते है ग्रीन पीजन
दुर्लभ प्रजाति के इस कबूतर आम कबूतरों से काफी आर्कषक
गोड्डा काॅलेज के जन्तु विभाग के प्राध्यापक प्रो. पी के वर्मा मानते है कि ग्रीन पीजन करते हैं सोसाइडल केस
गोड्डा : गोड्डा में मंगलवार को स्थानीय लोगों ने पहली बार एलोपोटा ग्रीन पीजन नामक बंगाल के पक्षी को देखा. वो भी मौत के बाद लोगों की नजर पड़ी. हलांकि इससे पहले वर्षों से गोड्डा सहित संताल परगना के लोगों ने माइग्रेट वर्ड के रूप में मेहमान पक्षियों को करीब तीन से चार माह विहार करते देखा करते है. एलोपोटा ग्रीन पीजन बंगाल में पाये जाने वाला दुर्लभ पक्षी है.
इस पक्षी के गोड्डा में पहली बार देखा गया .मेहमान पक्षी की मौत रहस्यमय बना हुआ है.
आशियाना साहेबगंज में सुबह कलरव गोड्डा व दुमका में
प्रवासी पक्षियों में शामिल प्रजातियों में जांघिल, शाहिल, लालसर आदि के नाम से प्रसिद्ध ऐसे पक्षी पांच से आठ किलो वजन होते हैं. पक्षी दिसंबर से जनवरी माह तक प्रजनन के बाद नये मेहमान को जन्म देने के बाद मौसम के बदलाव व गरमी की आहट से फरवरी के अंतिम सप्ताह पुन: वापस हो जाते हैं. इस बीच नये पक्षी भी उड़ान भरने की स्थिति में होते हैं.

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