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अफ्रीकी देश माली में फंसे 20 मजदूर लौटे भी नहीं कि मलेशिया में फंसे मजदूरों ने लगायी वतन वापसी की गुहार

गिरिडीह जिले के बगोदर प्रखंड के खेतको के चार मजदूर समेत गिरिडीह, हजारीबाग और बोकारो के 30 मजदूर रोजी-रोटी के लिए मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर के बेंटोंग गये थे, लेकिन मजदूरी नहीं मिलने के कारण वापस नहीं लौट पा रहे हैं.

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
Jharkhand News: मलेशिया में फंसे मजदूर
Jharkhand News: मलेशिया में फंसे मजदूर
प्रभात खबर

Jharkhand News: अफ्रीकी देश माली में फंसे झारखंड के 33 मजदूरों में 20 मजदूर अभी भी वतन नहीं लौटे हैं, वहीं दूसरी ओर मलेशिया में गिरिडीह के बगोदर के चार मजदूरों समेत झारखंड के विभिन्न जिलों के 30 मजदूर फंसे हुए हैं. इन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी समस्याओं को साझा करते हुए भारत सरकार व झारखंड सरकार से वतन वापसी की गुहार लगायी है. मजदूरों ने कहा है कि कंपनी ने चार माह की मजदूरी का भुगतान नहीं किया है. इससे उनके समक्ष खाने-पीने की समस्या हो गयी है. इनकी वीजा की अवधि भी खत्म हो गयी है.

चार माह से नहीं मिली मजदूरी

झारखंड के गिरिडीह जिले के बगोदर प्रखंड के खेतको के चार मजदूर समेत गिरिडीह, हजारीबाग और बोकारो के 30 मजदूर रोजी-रोटी के लिए मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर के बेंटोंग गये थे. तीन साल पहले 30 जनवरी 2019 को तीन साल की वीजा अवधि में ट्रांसमिशन लाइन में ये काम कर रहे थे. सभी मजदूर बोकारो जिले के गोमिया प्रखंड के तिसकोपी निवासी बासुदेव महतो और चेन्नई के एजेंट शिवम द्वारा तीन साल के एग्रीमेंट पर लीडमास्टर इंजीनियरिंग एंड कंस्ट्रक्शन एसडीएन बीएचडी में मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर में काम के लिये ले जाये गये थे, जहां मजदूरों को कंपनी ने चार माह से मजदूरी का भुगतान नहीं किया है.

वीजा की अवधि हुई खत्म

झारखंड के मजदूरों को चार माह की मजदूरी नहीं मिली है. इतना ही नहीं, मजदूरों के वीजा की अवधि भी समाप्त हो गयी है, लेकिन मजदूरों को बकाया मजदूरी नहीं दिया जा रहा है. इस कारण सभी मजदूर फंसे हुए हैं. ये मजदूर अब अपना वतन भारत लौटना चाहते हैं, लेकिन मजदूरी नहीं मिलने से उन्हें परेशानी हो रही है. सभी मजदूर डरे-सहमे हुए हैं.

खाने-पीने की समस्या

मजदूरों ने वीडियो जारी कर कहा है कि अब उनके वीजा की अवधि समाप्त हो गयी है. कंपनी ना तो मजदूरी दे रही है, ना ही भारत भेजने की पहल कर रही है. इनके अनुसार कंपनी का कहना है कि उसके पास पैसे नहीं हैं. मजदूरों को खाने-पीने की समस्या हो गयी है. राशन भी नहीं है. मजदूरों ने केंद्र सरकार, झारखंड सरकार एवं स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि से वतन वापसी की गुहार लगाई है. प्रवासी मजदूरों के हित में कार्य करने वाले समाजसेवी सिकन्दर अली ने कहा कि यह पहला मौका नहीं है, जब दलालों के चक्कर में पड़ कर गरीब तबके के लोग विदेशों में फंस जाते हैं. ऐसे में सरकार को इस पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है.

ये मजदूर वतन वापसी को लगा रहे गुहार

गिरिडीह जिले के बगोदर प्रखंड के खेतको के बिनोद कुमार महतो, बासुदेव महतो, रामेश्वर महतो, बुधन महतो, डुमरी प्रखंड के मंगलू आहार के बुधदेव प्रसाद, सेवाटांड़ के देवानंद महतो, घुटवाली के बिनोद महतो, हजारीबाग जिले के बिष्णुगढ़ प्रखंड के चानो के जगलाल महतो, गोबिन्द महतो, चेतलाल महतो, भुनेश्वर महतो, मनोज महतो, लीलो महतो, मंगरो के सुरेश महतो, रखवा के गिरघारी महतो, भेलवारा के प्रकाश कुमार महतो, सपमरवा के तिलेश्वर महतो, टूटकी के प्रदीप कुमार महतो, बोकारो जिले के गोमिया प्रखंड के तिसकोपी के रोहित महतो, प्रेमलाल महतो, दशरथ महतो, केशु महतो, बासुदेव महतो, विश्वनाथ महतो, बड़की सीधाबारा के पुनीत महतो, छोटकी सीधाबारा के प्रेमचंद महतो, चिलगो के टुकामन महतो, बोकारो जिले के नावाडीह प्रखंड के महुवाटांड़ के दुलारचंद महतो, भुनेश्वर कमार, झरी कमार शामिल हैं.

रिपोर्ट: कुमार गौरव

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