मुनि श्री ने समर्पण को व्यक्तित्व निखारने का आधार बताते हुए कहा कि गुरुचरणों में समर्पण से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आता है. उन्होंने कहा कि आत्मा मूलतः शुद्ध है, लेकिन कर्मों की मलिनता को दूर करने के लिए तप आवश्यक है. उन्होंने जीवन के संकटों को निर्माण का माध्यम बताते हुए कहा कि कठिनाइयां व्यक्ति को मजबूत बनाती हैं. साथ ही बाहरी और आंतरिक युद्ध का अंतर समझाते हुए बताया कि मनुष्य का सबसे बड़ा संघर्ष अपने भीतर के क्रोध, लोभ और अहंकार से होता है, जिसे केवल ज्ञान के माध्यम से जीता जा सकता है. कार्यक्रम में श्रद्धालुओं की जिज्ञासाओं का समाधान किया गया.
135 देशों में हो रहा प्रसारण
शंका समाधान कार्यक्रम प्रतिदिन विभिन्न माध्यमों से 135 देशों में प्रसारित हो रहा है. वहीं, 27 अप्रैल से 2 मई तक गुणायतन परिसर में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव होगा. इसमें देशभर के श्रद्धालुओं को आमंत्रित किया गया है.
