गुणायतन मध्यभारत के राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन ने बताया कि मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज के सान्निध्य में दीक्षा संस्कार विधिपूर्वक सम्पन्न हुआ. प्रतिष्ठाचार्य ब्रह्मचारी अशोक भैया व अभय भैया ने प्रमुख पात्रों के माध्यम से राज्याभिषेक विधि, भरत-बाहुबली प्रसंग तथा ब्राह्मी एवं सुंदरी द्वारा अंक विद्या के शिक्षण का प्रभावी मंचन किया. कार्यक्रम में भरत और बाहुबली के मध्य सत्ता संघर्ष तथा बाहुबली के वैराग्य को भी सजीव रूप में प्रस्तुत किया गया. साथ ही असी, मसी, कृषि, विद्या, वाणिज्य एवं शिल्प जैसे षट्कर्मों का महत्व समझाया गया. शुक्रवार को पंचकल्याणक महोत्सव के पांचवें दिन प्रातः आहार चर्या व मध्याह्न में समवसरण में भगवान को केवलज्ञान प्राप्ति का आयोजन होगा, जहां मुनि श्री की देशना होगी.
मुनि श्री का संदेश
धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने कहा कि मनुष्य जीवन अत्यंत दुर्लभ और अनमोल अवसर है. उत्तम परिवार, श्रेष्ठ संस्कार, सुसंस्कृत बुद्धि एवं स्वस्थ शरीर मिलना अपने-आप में सौभाग्य की बात है. यदि इनमें से कोई एक भी अभाव हो, तो जीवन की दिशा बदल सकती है. गृहस्थ जीवन पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करना चाहिए तथा प्रतिदिन स्वाध्याय, ध्यान और णमोकार मंत्र का अभ्यास करना चाहिए. मुनि श्री संधान सागर, सार सागर जी महाराज , समादर सागर जी महाराज व रूप सागर महाराज सहित संघ के अन्य सदस्य उपस्थित रहे.
