गिरिडीह : नेशनल मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की ओर से लाये जा रहे मेडिकल बिल के खिलाफ आइएमए के चिकित्सकों ने शनिवार को 12 घंटे का कार्य बहिष्कार किया. साथ ही आइएमए की ओर से सदर अस्पताल के सिविल सर्जन कार्यालय में धरना देकर सिविल सर्जन और उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा गया. कार्य बहिष्कार का नेतृत्व आइएमए के अध्यक्ष डाॅ. विद्याभूषण ने किया.
इस दौरान निजी अस्पतालों व क्लिनिकों में सुबह छह बजे से शाम बजे तक ओपीडी का कार्य ठप रहा. केवल इमरजेंसी सेवाएं दी गयी. हालांकि चिकित्सकों के कार्य बहिष्कार आंदोलन से मरीजों को थोड़ी परेशानी झेलनी पड़ी. मौके पर अध्यक्ष डाॅ. भूषण ने कहा कि नेशनल मेडिकल काउंसिल का बिल चिकित्सकों के हित में नहीं है. इसके लिए आइएमए की लड़ाई सड़क से सदन तक हो रही है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से इस बिल में संशोधन की मांग की गयी थी, लेकिन केंद्र सरकार इसमें संशोधन किये बगैर ही इसे पारित करना चाह रही है.
इससे आनेवाले दिनों में देश में लोग चिकित्सक बनना पसंद नहीं करेंगे. एक चिकित्सक एक छोटा सा भी अस्पताल नहीं खोल पायेंगे. उन्हें प्रशासन की सख्ती का सामना करना होगा. प्रशासन जब चाहे अस्पताल को बंद करवा देगी. आइएमए महिला विंग की डाॅ. अमिता राय ने कहा कि सरकार ब्रीज कोर्स करवाकर यूनानी, होमियोपैथ और आयुर्वेदिक कोर्स कराकर चिकित्सक तैयार कर रहे हैं. इससे मरीजों का भला नहीं हो सकता. एनएमसी बिल से चिकित्सा क्षेत्र को भारी नुकसान पहुंचेगा. सरकार परंपरागत पद्धति को बरकरार रखना चाहती है.
ये थे मौजूद : मौके पर डॉ. कमलेश्वर प्रसाद, डाॅ. आजाद, डाॅ. शीला वर्मा, डाॅ. रेखा झा, डाॅ. राजेश कुमार, डाॅ. मधुभूषण, डाॅ. दीपक कुमार, डाॅ. विनय गुप्ता, डाॅ. उत्तम जालान, डाॅ. विकास केडिया, डाॅ. राजेश दूबे समेत कई चिकित्सक मौजूद थे.
