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Ukraine Russia Crisis: यूक्रेन से झारखंड लौटे MBBS स्टूडेंट अशरफ ने परिजनों को सुनायी दर्दभरी दास्तां

इदू अंसारी का पुत्र अशरफ अंसारी यूक्रेन से झारखंड सुरक्षित लौट आया है. वह वहां एमबीबीएस की पढ़ाई करता है. सकुशल घर पहुंचने के बाद अशरफ अंसारी के पिता इदू अंसारी, माता, भाइयों एवं परिवार के अन्य सदस्यों ने खुशी जाहिर की.

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
Ukraine Russia Crisis: परिजनों के साथ अशरफ अंसारी
Ukraine Russia Crisis: परिजनों के साथ अशरफ अंसारी
प्रभात खबर

Ukraine Russia Crisis: झारखंड के गढ़वा जिले के खरौंधी थाना क्षेत्र के बजरमरवा गांव के इदू अंसारी का पुत्र अशरफ अंसारी यूक्रेन से झारखंड सुरक्षित लौट आया है. वह वहां एमबीबीएस की पढ़ाई करता है. सकुशल घर पहुंचने के बाद अशरफ अंसारी के पिता इदू अंसारी, माता, भाइयों एवं परिवार के अन्य सदस्यों ने खुशी जाहिर की. अशरफ के घर पहुंचने की खुशी में परिवार वालों ने गांव-घर में मिठाइयां बांटीं. अशरफ के घर वापसी पर बीडीओ गणेश महतो, प्रमुख धर्मराज पासवान, बसंत कुमार यादव, राजेश रजक, संध्याकर विश्वकर्मा आदि ने बधाई दी. इसके साथ ही उन्होंने यूक्रेन की परिस्थितियों की जानकारी ली.

काफी दहशत में बीते दिन

यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई करने गया खरौंधी का छात्र अशरफ अंसारी ने बताया कि 20 फरवरी को इंडियन एंबेसी ऑफ यूक्रेन के द्वारा एडवाइजरी जारी की गई कि इंडिया से जितने भी छात्र पढ़ने के लिए यूक्रेन आए हैं, वे जितना जल्द हो सके, यूक्रेन को खाली कर दें क्योंकि रूस कभी भी यूक्रेन पर हमला कर सकता है. इसके बाद देश में वापस लौटने के लिए एयर इंडिया की फ्लाइट बुकिंग के लिए गया तो एक तरफ से जाने के लिए 60 हजार किराया कर दिया गया था. अशरफ ने कहा कि उसने टिकट करवा लिया,परंतु उसका दोस्त साजिद अंसारी रमना का रहने वाला था. वह टिकट खरीदने में असमर्थ था. जिसके चलते उन्होंने हॉस्टल में ही रहने का फैसला किया.

यूक्रेन सरकार ने की मदद

अशरफ ने बताया कि जेंपोरोजिया स्टेट मेडिकल यूनिवर्सिटी एवं उसके कांट्रैक्टर के द्वारा उन्हें युद्ध होने की आशंका के बारे में नहीं बताया गया. उनके द्वारा आखिरी तक रोकने का प्रयास किया गया. उन्होंने कहा कि जिस दिन स्वदेश लौट रहे थे, उस दिन हंगरी बॉर्डर तक जाने में यूक्रेन सरकार के द्वारा भरपूर सहयोग मिला. उन्होंने बताया कि जिस दिन जेंपोरोजिया सिटी को स्वदेश लौटने के लिए छोड़ा था, उसी दिन जेंपोरोजिया पर रूस के द्वारा हमला किया गया था. यूक्रेन सरकार ने उनलोगों को हंगरी के बॉर्डर तक जाने के लिए ट्रेन एवं बस की व्यवस्था की थी. जिसके लिए किसी प्रकार की कोई राशि नहीं ली गयी. ट्रेन में भोजन की व्यवस्था भी यूक्रेन सरकार के द्वारा की गई थी.

भारतीय अधिकारियों से हुआ संपर्क

अशरफ ने बताया कि जेंपोरोजिया सिटी स्थित हॉस्टल से स्वदेश लौटने के लिए 27 फरवरी को निकला था तो जेंपोरोजिया रेलवे स्टेशन पर ट्रेन को पकड़ा. ट्रेन में 22 घंटे के सफर के बाद यूक्रेन स्थित लवीव 28 फरवरी को लगभग चार बजे पहुंचा. लवीव से हंगरी बॉर्डर तक जाने के लिए यूक्रेन सरकार ने बस की व्यवस्था की थी. बस से लगभग सात घंटे के सफर के बाद हंगरी बॉर्डर स्थित चोप तक पहुंचा, जहां पर बॉर्डर पार करने के लिए छात्रों की काफी भीड़ लगी थी. एक हजार रुपये प्रति छात्र देकर बॉर्डर पार किया. इसके बाद हंगरी की सीमा पर स्थित उज्जवनी रेलवे स्टेशन से ट्रेन पकड़कर हंगरी की राजधानी वुडापेस्ट पहुंचा. इंडियन एंबेसी में अधिकारियों से मुलाकात हुई. इसके बाद रात भर रुकने के बाद सुबह दिल्ली के लिए रवाना हुआ. इसके बाद गुरुवार को 12 बजे रांची पहुंचा. दूसरे दन शुक्रवार को अपने घर खरौंधी पहुंचा.

रिपोर्ट: अभिमन्यु कुमार

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