गढ़वा से जितेंद्र सिंह की रिपोर्ट
Garhwa News: झारखंड के शहर के व्यस्त मेन रोड स्थित फुटबॉल स्टेडियम के समीप शुक्रवार की रात एक लापरवाही भारी पड़ गई. ट्रांसफार्मर के नीचे जमा कचरे में लगी आग ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई. इस घटना के कारण सदर अस्पताल और चिनिया रोड समेत शहर के कई महत्वपूर्ण हिस्सों में करीब तीन घंटे तक बिजली आपूर्ति ठप रही.
कचरे से लगी आग
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, फुटबॉल स्टेडियम के पास स्थित ट्रांसफार्मर के नीचे लंबे समय से कचरा डंप किया जा रहा था. शुक्रवार शाम इसी कचरे में अचानक आग लग गई. लपटें इतनी तेज थीं कि उन्होंने जल्द ही पूरे ट्रांसफार्मर को अपनी चपेट में ले लिया. आग की स्थिति देख राहगीर और स्थानीय दुकानदार सहम गए. सूचना मिलने के बाद विद्युत विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक उपकरण काफी हद तक क्षतिग्रस्त हो चुके थे.
अस्पताल सहित इन इलाकों में रहा अंधेरा
आग लगने की इस घटना से शहर की बिजली व्यवस्था चरमरा गई. सदर अस्पताल, संजना क्षेत्र और चिनिया रोड जैसे इलाकों में करीब 3 घंटे तक बिजली गुल रही. अस्पताल जैसी आपातकालीन सेवाओं पर बिजली कटने का सीधा असर देखा गया, जिससे मरीजों और परिजनों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी.
विभाग ने जताई चिंता
विभाग के जूनियर इंजीनियर कमल कुमार ने इस घटना पर गहरी चिंता जाहिर की है. उन्होंने कहा कि ट्रांसफार्मर के नीचे कचरा फेंकना सीधे तौर पर हादसों को आमंत्रण देना है. इस लापरवाही से न केवल सरकारी संपत्ति (ट्रांसफार्मर और केबल) को नुकसान होता है, बल्कि हजारों उपभोक्ताओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है. उन्होंने बताया कि दानरो नदी किनारे स्थित नए विद्युत सबस्टेशन के पास भी स्थिति चिंताजनक है. वहां 33 KV और 11 KV की अंडरग्राउंड केबल सड़क के नीचे से गुजरती है, जिसके ठीक ऊपर नगर परिषद द्वारा कचरा फेंका जा रहा है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर वहां आग लगती है और केबल क्षतिग्रस्त होती है, तो बाजार, ऊंचरी, सोनपुरवा और टंडवा जैसे बड़े इलाकों में 24 घंटे तक का ब्लैकआउट हो सकता है.
लोगों से अपील
विभाग ने गढ़वा नगर परिषद और आम नागरिकों से अपील की है कि वे ट्रांसफार्मर और बिजली के खंभों के आसपास कचरा न डालें. विभाग ने स्पष्ट किया कि सुरक्षित बिजली आपूर्ति के लिए आम जनता का सहयोग अनिवार्य है, जिससे कि भविष्य में इस तरह की घटना, जान-माल की हानि और व्यवस्था संबंधी रुकावटों से बचा जा सके.
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