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International Literacy Day 2021 : गढ़वा में 1.10 लाख लोग अब भी निरक्षर, 60 फीसदी ही हो पाये हैं साक्षर

गढ़वा जिले में साक्षरता कार्यक्रम वर्ष 2018 से बंद है. इस कार्यक्रम के बंद होने से जहां ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर और प्रेरक बेरोजगार हो गये हैं, वहीं साक्षर बनाने का अभियान भी बीच में ही लटक गया है. जिले में 1.10 लाख लोग अभी भी निरक्षर रह गये हैं. वहीं, जिले में 60 प्रतिशत लोग ही साक्षर हो पाये हैं.

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
गढ़वा में साक्षरता कार्यक्रम बंद होने से ग्रामीण महिलाओं पर दिख रहा असर.
गढ़वा में साक्षरता कार्यक्रम बंद होने से ग्रामीण महिलाओं पर दिख रहा असर.
फाइल फोटो.

Jharkhand News (पीयूष तिवारी, गढ़वा) : झारखंड के गढ़वा जिले में साल 2018 से साक्षरता कार्यक्रम बंद है. इस वजह से इस अभियान से जुड़े प्रखंड कार्यक्रम प्रबंधक (Block Program Manager) और प्रेरक (Motivational) आदि बेरोजगार हो गये हैं. वे अब साक्षरता कार्यक्रम शुरू होने की आशा छोड़ दूसरे काम-धंधे में लग गये हैं. इससे गढ़वा जिले के सभी लोगों को साक्षर बनाने का अभियान बीच में ही लटक गया है.

गढ़वा जिले में साल 2011 में शुरू किये गये साक्षर भारत कार्यक्रम के तहत जिले में 2.25 लाख निरक्षर लोगों का नामांकन किया गया था. इसमें से यह कार्यक्रम बंद होने तक यानी मार्च 2018 तक 1.15 लाख लोगों को साक्षर बनाया जा गया है. कार्यक्रम बंद होने से जिले में नामांकित 1.10 लाख लोग अभी भी निरक्षर रह गये हैं. यद्यपि पूरे जिले की करीब 14 लाख की आबादी में 60 प्रतिशत लोग ही साक्षर हुए हैं. गढ़वा जिले के निरक्षरों में महिलाओं की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है. जिले में 47.5 प्रतिशत महिलाएं तथा 72.19 पुरुष ही साक्षर हैं.

गढ़वा जिले में 2001 में शुरू हुआ था संपूर्ण साक्षरता अभियान

गढ़वा जिले में केंद्र सरकार की ओर से साल 2001 में संपूर्ण साक्षरता अभियान की शुरुआत हुई थी. इसके बाद वर्ष 2011 में साक्षर भारत कार्यक्रम शुरू किया गया. इस कार्यक्रम के तहत जिले में 196 लोक शिक्षा केंद्र बनाये गये. इन लोक शिक्षा केंद्र को चलाने के लिए पुराने 14 प्रखंड के हिसाब से 14 प्रखंड कार्यक्रम प्रबंधक तथा 392 प्रेरक नियुक्त किये गये हैं. साक्षरता प्रेरकों एवं प्रखंड कार्यक्रम प्रबंधकों का करीब एक साल का मानदेय भुगतान बकाया है.

साक्षर भारत कार्यक्रम 2018 मार्च तक चलाया गया है, जबकि प्रेरक आदि को 2017 तक का ही मानदेय दिया गया है. उनका 14 माह का मानदेय अभी तक बकाया रह गया है. कार्यक्रम बंद होने से प्रेरक पूरी तरह से बेरोजगार हो गये हैं. बीते लोकसभा व विधानसभा चुनाव में प्रेरकों को बीएलओ का दायित्व देते हुए चुनाव कार्य में लगाया गया था.

देश में सबसे अधिक साक्षरता बढ़ाने का गौरव मिल चुका है गढ़वा को

साल 2008 में गढ़वा जिले को साक्षरता अभियान के तहत सबसे अधिक साक्षरता दर बढ़ानेवाला जिला बनने का खिताब मिला है. तब इसके लिए गढ़वा को सत्येन मित्रा पुरस्कार से नवाजा गया था. तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा सिंह पाटिल ने दिल्ली में साक्षरता विभाग से जुड़े पदाधिकारियों को बुलाकर यह पुरस्कार दिया था.

सभी गतिविधियां बंद पड़ी हुई : संतोष तिवारी

इस संबंध में जिला कार्यक्रम प्रबंधक संतोष तिवारी ने बताया कि कोरोना की वजह से 8 सितंबर विश्व साक्षरता दिवस पर कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं होगा. उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से कोई नया निर्देश नहीं मिलने से साक्षरता की ओर से सभी गतिविधियां पूरी तरह से बंद पड़ी हुई है.

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