रंका अनुमंडल के 57 गांव में हाथियों का कहर, दो वर्षों में 34 ग्रामीणों की मौत

– हाथियों के डर शाम ढलते ही वीरान हो जाते हैं गांव

– हाथियों के डर शाम ढलते ही वीरान हो जाते हैं गांव जितेंद्र सिंह, गढ़वा. छत्तीसगढ़ से सटे झारखंड के गढ़वा जिले के रंका अनुमंडल अंतर्गत तीन प्रखंडों के 57 गांव इन दिनों हाथियों के आतंक से बेहाल हैं. हर साल की तरह इस वर्ष भी दर्जनों हाथियों का झुंड सीमावर्ती जंगलों से निकलकर झारखंड में प्रवेश कर रहा है और गांवों में जानमाल और फसलों को भारी क्षति पहुंचा रहे हैं. इससे ग्रामीणों के खेत बर्बाद हो रहे हैं, घर उजड़ रहे हैं और रातों की नींद भी खराब हो रही है. गढ़वा के रंका अनुमंडल में आने वाले प्रखंड रंका, रामकंडा और चिनिया छत्तीसगढ़ की सीमा से सटे हुये हैं. यहीं से हाथियों का दल प्रवेश करता है. इन हाथियों का मुख्य स्रोत छत्तीसगढ़ की ओर स्थित कनहर नदी और उसके आस-पास के घने जंगल हैं. जब बारिश और फसल का मौसम आता है, तो ये झुंड भोजन और पानी की तलाश में गांवों का रुख करते हैं. रंका अनुमंडल में हाथियों ने दो साल में 34 लोगों को मौत के घाट उतारा दिया है. आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2023-24 में 16 और वर्ष 2024- 25 में अब तक 18 लोगों की मौत हाथियों के हमले से हो चुकी है. वहीं दर्जनों पशुु भी हाथियों का शिकार हो चुके हैं. सैकड़ों घरों को भी हाथियों ने क्षतिग्रस्त किया है. साथ ही सैकड़ों एकड़ में लगी फसल को भी बर्बाद कर दिया. ………………….. रातें बन जाती हैं खौफनाक ग्रामीणों के अनुसार, हाथी शाम ढलते ही गांवों की ओर बढ़ते हैं. शुरुआत खेतों से होती है, जहां धान, मक्का, अरहर जैसी फसलें चंद मिनटों में ही नष्ट कर दी जाती है. इसके बाद ये झुंड घर व आंगन में घुसकर अनाज, सब्जी, नमक, यहां तक कि मवेशियों को भी नुकसान पहुंचाते हैं. प्रभावित गांव के ग्रामीणों बताया कि वे रातभर जागकर पहरा देते हैं, लकड़ी जलाते हैं और पटाखे भी फोड़ते है. ग्रामीणों ने बताया कि अगर एक बार हाथी गांव में घुस गया, तो सब उपाय बेकार हो जाते हैं. इन 57 गांवों में जैसे ही सूरज ढलता है, सड़कें सुनसान हो जातीं हैं. लोग दरवाजे बंद कर खुद को घरों में कैद कर लेते हैं. सिर्फ कागजों पर हैं सरकारी योजनाएं ग्रामीणों का आरोप है कि हाथियों के आतंक को लेकर सरकार और वन विभाग ने अब तक कोई ठोस योजना नहीं बनायी है. जहां-जहां हाथियों का हमला होता है, वहां पंचनामा बनाकर मुआवजा देने की बात की जाती है, लेकिन समय पर राहत भी नहीं मिलती है. ……………….. रंका अनुमंडल के इन गावों में हाथियों का कहर हाथियों के आतंक से रंका अनुमंडल का चिनिया प्रखंड सबसे अधिक प्रभावित है. प्रखंड के सभी 30 गांव में हाथियों का कहर है. खुरी, सरकी, तानपुरा, चिरका, चपकली, रणपुरा सबसे अधिक प्रभावित हैं. नकसीली, बेता, पाल्हें और सिद्दे को हाथी जोन के रूप में चिह्नित किया गया है. चिरका में चार और चपकली में एक ग्रामीण की मौत हाथियों के हमले में हो चुकी है. वहीं रमकंडा प्रखंड के 16 गांव हाथियों के आतंक से ग्रसित हैं. इनमें दुर्जन, होमिया, बैरवा, तेतरडीह, कुशवार, विराजपुर, मंगराही, गंगा टोली, तिलैया, मुरली, रमकंडा, ऊपर टोला, रोहड़ा तथा केेरवा शामिल है. जबकि रंका प्रखंड के 11 गांव प्रभावित हैं. इसमें बांदु, चुतरू, बरदरी, भौंरी, चुटिया,विश्राामपुर, बरवााही, कटरा तथा बरवाहा आदि शामिल है. ………………. ग्रामीणों ने कहा, छोड़ देंगे खेती करना चिनिया प्रखंड के प्रभावित गांव के ग्रामीणों ने सरकार के प्रति आक्रोश जताते हुये कहा कि चार माह पहले चिरका गांव के राजकुमार सिंह को हाथियों ने कुचल कर मार डाला था. उनके परिवार को अब तक मुआवजा नहीं मिला है. ग्रामीणों ने कहा कि मेहनत से की गयी खेती हाथी पल भर में रौंदकर बर्बाद कर देते हैं. मुआवजा भी नहीं मिलता. हाथी आना बंद नहीं करेंगे और न ही सरकार इन्हें आने से रोक पा रही है ऐसे में हम अब खेती करना छोड़ देंगे. भोजन की तालाश में आते हैं हाथी जानकारों के अनुसार लगातार जंगली हाथियों का गांव में पहुंचकर आतंक मचाना इस बात का संकेत है कि उन्हें या तो जंगलों में पर्याप्त भोजन नहीं मिलता या उनके विचरण के लिये जंगल ही नहीं बचेे हैं. जानकार बताते हैं कि हाथियों को काफी भोजन और पानी की जरूरत होती है. भोजन नहीं मिलने पर वे गांव की ओर रूख करते हैंं और तबाही मचाते हैं. दो बार भेजा गया कॉरिडोर बनाने का प्रस्ताव रंका अनुमंडल में हाथियों के आतंक और इससे प्रभावित लोगों को राहत देने के लिए गढ़वा दक्षिणी वन प्रमंडल ने 76 गांव को हाथी कॉरिडोर बनाने की मांग को लेकर प्रस्ताव भेजा, लेकिन अब तक सरकार ने इस मामले में कोई संज्ञान नहीं लिया है. ग्रामीणों को जागरूक कर रहा है वन विभाग : डीएफओ गढ़वा दक्षिणी वन प्रमंडल पदाधिकारी एबीन बेनी अब्राहम ने बताया कि हाथियों को ट्रैक करने के लिए तीन टीम बनायी गयी है. इनमें चिनिया, भंवरी एवं भंडरिया में हाथियों के आनेवाले संभावित क्षेत्रों में एक्सपर्ट टीम ट्रैकिंग करती है. शाम ढ़लने से पहले ही ग्रामीणों को व्हाट्सऐप के माध्यम से जागरूक किया जाता है. उन्हें हाथियों से अपना बचाव करने व सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी जाती है. वन विभाग की टीम ग्रामीणों के बीच लगातार जागरूकता अभियान चला रही है.

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Published by: Akarsh aniket

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