गढ़वा: झारखंड प्रदेश आंगनबाड़ी वर्कर्स यूनियन ने मंगलवार को समाहरणालय पर धरना दिया. अपनी मांगों को लेकर सेविका व सहायिकाओं ने समाहरणालय पर प्रदर्शन किया तथा धरना के माध्यम से अपनी सेवा स्थायी करने व वेतन भुगतान करने की मांग को रखा़ इसके पूर्व गोविंद उवि के मैदान से समाहरणालय तक एक जुलूस निकाला. धरना सभा को संबोधित करते हुए प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष बालमुकुंद सिन्हा ने कहा कि बच्चों व महिलाओं के पोषण के लिए सेविका व सहायिकाएं काफी मेहनत कर रही है़ं लेकिन इसके बदले सेविका व सहायिकाओं की समस्याओं को सुननेवाला कोई नहीं है़ केंद्र व राज्य सरकार लगातार इनके हितों की अनदेखी कर रही है़.
उन्होंने कहा कि लंबे समय तक काम करने के बाद जब सेविका व सहायिकाएं सेवानिवृत्त होती हैं, तो उनके हाथ खाली होते है़ं जबकि दूसरे सरकारी कर्मियों से किसी भी मामले में इनकी मेहनत कम नहीं है़ धरना के पश्चात उपायुक्त को सात सूत्री मांगपत्र सौंपा गया, इसमें सेवा स्थायी करने, तृतीय व चतुर्थवर्गीय कर्मचारी का दर्जा देने, सेविका व सहायिका नियमावली बनाने, मानदेय के बदले सेविका को 20 हजार रुपये वेतन व सहायिकाओं को 10 हजार रुपये वेतन देने, जिले में बकाये नौ महीने के मानदेय व पोषाहार की राशि का भुगतान करने, सबला पोषाहार का बकाया राशि का भुगतान करने तथा आंगनबाड़ी केंद्र के बढ़े हुए किराया का भुगतान करने की मांग शामिल है़ इस मौके पर जिलाध्यक्ष रंजीत पांडेय, वृंदा देवी, श्यामदुलारी देवी, प्रभा देवी, अनीता पांडेय, रीता देवी, अंजनी देवी, उमा देवी, कलावती देवी, पानपति देवी, चंद्रावती देवी, सत्यवती देवी, सुनीता लकड़ा, करमी देवी, राजकुमारी कुवंर, शबनम खातून, मालती देवी, पुनम देवी, इम्तेयाज खां, रामचंद्र पासवान सहित अन्य लोग उपस्थित थे़
उपायुक्त से वार्ता के बाद जिलाध्यक्ष हुई बेहोश
धरना के पश्चात आंगनबाड़ी वर्कर्स यूनियन की जिलाध्यक्ष रंजीता पांडेय के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल उपायुक्त से मिलकर अपनी समस्याओं को रखा़ वार्ता के बाद बाहर निकलने पर श्रीमति पांडेय बेहोश होकर गिर पड़ी, जिसे इलाज के लिए गढ़वा सदर अस्पताल में भरती कराया गया़ इस संबंध में अन्य सेविकाओं ने आरोप लगाया कि उपायुक्त ने उनके वार्ता के क्रम में अच्छा व्यवहार नहीं किया, जिससे सदमा लगने से रंजीता पांडेय बेहोश हो गयी थी़
