नेताओं को किसानों की समस्याओं से नहीं बल्कि अपने वोट की चिंता है़ वे लोगों को जाति व धर्म में बांटकर सत्ता तक पहुंच रहे है़ं किसान देश का अन्नदाता है़ किसानों को अपनी समस्याओं को लेकर स्वयं आवाज बुलंद करनी होगी़ संगठन के अभाव में किसान अपना अधिकार प्राप्त नहीं कर सकते है़ं इस मौके पर आइएमए के अध्यक्ष डॉ यासीन अंसारी ने कहा कि किसानों की माली हालत देश में दिन ब दिन बिगड़ती जा रही है़ किसानों को फसलों का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है़, जिससे कर्ज में डूबे किसान आत्महत्या करने को विवश हो रहे है़ं.
किसानों को एक बैनर के नीचे संगठित होकर अपनी मांगों के समर्थन में आंदोलन करना होगा़ इसके लिए वे हमेशा सहयोग करने को तैयार है़ं विचार गोष्ठी को मेराल प्रमुख विकास सिंह कुशवाहा, खरौंधी प्रमुख धर्मराज पासवान, पूर्व मुखिया मुस्लिम करार, शंकर प्रताप विश्वकर्मा, संस्थापक बाल्मिकी चौबे, सीताराम चौबे, ललन प्रसाद श्रीवास्तव, मुंगालाल बैठा आदि ने भी विचार रखे़ अध्यक्षता शिवकुमार विश्वकर्मा ने की़ बैठक के अंत में निर्णय लिया गया कि अगली बैठक के पूर्व कमेटी का विस्तार कर लिया जायेगा़ इसके लिए बाल्मिकी चौबे, शिवकुमार विश्वकर्मा तथा मुसलिम करार को दायित्व सौंपा गया़ इस अवसर पर उपरोक्त के अलावा अमानत हुसैन, रामयाद साव, प्रेम प्रसाद, विजय प्रसाद, गोपाल चौबे, श्यामलाल साव, प्रकाश कुमार अरुण, बलदेव मेहता, कपिलदेव पासवान, विश्वनाथ साव, मकबूल अंसारी, भिखारी मिस्त्री सहित अन्य लोग उपस्थित थे़.
