शाम में श्रवण डोम के घर में मुर्गा बन रहा था, जब धनंजय को लेने के लिए उसके पिता दशरथ गये, तो उसे यह कहकर वापस भेज दिया गया कि कुछ देर में वे उसे पहुंचा देंगे़ लेकिन रात में धनंजय डोम शराब के नशे में घर आया और कुछ देर में उसकी मौत हो गयी़.
पिता दशरथ डोम ने प्राथमिकी दर्ज करायी थी कि जमीन विवाद को लेकर उसे बेटे की हत्या श्रवण डोम व गंगा डोम सहित अन्य अभियुक्तों ने मिलकर कर दी है़ प्राथमिकी के आलोक में अनुसंधान कर आरोप पत्र समर्पित किया गया था, जिसके पश्चात न्यायालय द्वारा साक्षियों का साक्ष्य कलमबद्ध कर उपलब्ध दस्तावेज के आधार पर भादवि की धारा 328 में 10 साल कैद की सजा तथा 5000 रुपये जुर्माना व भादवि की धारा 302 में आजीवन कारावास की सजा सुनायी गयी़ बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता साकेत प्रताप देव तथा अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक अलख निरंजन ने पैरवी की़.
