बरसोल. बरसोल के दूधकुंडी गांव में हाथियों का उत्पात थम नहीं रहा है. सोमवार की रात्रि तीन हाथियों ने गांव में लगभग तीन एकड़ में गरमा धान की फसल को पूरी तरह रौंद दिया. घटना के बाद से गांव के करीब 60 परिवारों में दहशत का माहौल है. ग्रामीण अपनी जान-माल की रक्षा के लिए रतजगा करने को विवश हैं.
मशालों के दम पर खदेड़ने की कोशिश:
हाथियों के आने की सूचना मिलते ही वन विभाग की 10 सदस्यीय क्विक रिस्पांस टीम पहुंची. टीम ने ग्रामीणों के सहयोग से हाथ में मशालें लेकर और शोर मचाकर हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ने का प्रयास किया. वनकर्मी और ग्रामीण पूरी रात गांव की गलियों और खेतों में पहरा देते रहे, ताकि हाथियों को दोबारा आबादी में घुसने से रोका जा सके.ग्रामीणों की आजीविका पर गहरा संकट:
दूधकुंडी गांव के अधिकतर लोग किसान हैं. ये धान और सब्जियों की खेती कर अपना गुजर-बसर करते हैं. किसानों का कहना है कि महीनों की मेहनत और पूंजी लगाकर उगायी गयी फसल को हाथियों ने मिनटों में बर्बाद कर दिया. ग्रामीणों ने बताया कि यह समस्या कई वर्षों से है. प्रशासन द्वारा हाथियों को खदेड़ा जाता है, लेकिन अनुकूल वातावरण और भोजन की उपलब्धता के कारण वे अगले ही दिन वापस लौट आते हैं.
