East Singhbhum News : ‘श्यामलाल’ से लड़ाई में घायल हुआ ‘रामलाल’, इलाज से हो रहा स्वस्थ

ग्रामीणों ने खोला चावल मिल का दरवाजा

घाटशिला. सीमावर्ती जंगल महल इलाके का परिचित और लोकप्रिय हाथी ‘रामलाल’ गंभीर रूप से घायल है. उसके आगे के पैर में गहरी चोट लगने के कारण वह चलने-फिरने में असमर्थ हो गया था. बीमार हाथी की बेबसी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद वन विभाग तुरंत सक्रिय हुआ. फिलहाल रामलाल माणिकपाड़ा रेंज के गोविंदपुर जंगल में है, जहां वन विभाग की मेडिकल टीम उसका उपचार कर रही है. वन विभाग के अनुसार, कुछ दिन पहले रामलाल का मुकाबला एक अन्य हाथी ‘श्यामलाल’ से हुआ था. इसी आपसी संघर्ष में उसके आगे के पैर में गंभीर चोट आयी. करीब 50 वर्ष से अधिक उम्र होने के कारण उसके लिए इस चोट से उबरना चुनौतीपूर्ण हो रहा है. घायल अवस्था में वह कई दिनों तक जंगल के विभिन्न हिस्सों में भटकता रहा. झाड़ग्राम के डीएफओ उमर इमाम स्वयं मौके पर पहुंचकर इलाज की निगरानी कर रहे हैं. विभाग का कहना है कि दो दिनों के उपचार के बाद अब उसकी स्थिति में सुधार है और उसने थोड़ी हरकत शुरू की है. रामलाल को लेकर स्थानीय लोगों की गहरी संवेदनाएं जुड़ी हैं. ग्रामीण न केवल उसके ठीक होने की प्रार्थना कर रहे हैं, बल्कि नियमित रूप से उसके खाने-पीने का प्रबंध भी कर रहे हैं. हाथी के प्रति प्रेम का आलम यह है कि इलाके की एक चावल मिल का दरवाजा उसके लिए हमेशा खुला रखा जाता है, ताकि वह अपनी भूख मिटा सके. गौरतलब है कि इससे पहले भी रामलाल तीर लगने से घायल हुआ था, तब भी वन विभाग और ग्रामीणों के सहयोग से उसे नया जीवन मिला था. फिलहाल वन कर्मी उस पर 24 घंटे नजर रख रहे हैं.- अधिक उम्र के कारण रामलाल हाथी कमजोर हो गया है. ऊपर से दूसरे हाथी के साथ लड़ाई में घायल हुआ है. उसके आगे के पैर में चोट थी. पिछले दो दिनों से इलाज चल रहा है. अब वह पहले से काफी बेहतर है.

– उमर इमाम

, डीएफओ, झाड़ग्राम

दूधकुंडी और दारीसोल गांव में घूम रहा हाथी, दहशत

बरसोल. बहरागोड़ा के दूधकुंडी और दारीसोल में एक हाथी बेखौफ होकर गांवों में घूम रहा है. हाथी जिस गांव में घुस रह है, वहां लोग जान बचा कर भागने को विवश हैं. हाथियों ने गांव के कई किसानों के खेतों में लगी सब्जियों की फसल को बर्बाद किया. रविवार की सुबह सिंह जंगल से निकलकर हाथी दारीसोल जंगल पहुंचा. वहां से अचानक एनएच 49 मुख्य पथ पर आ गया. उस समय अफरा-तफरी का माहौल रहा. लोग जान बचा कर इधर-उधर भागे. बाद में काफी मशक्कत के बाद हाथी को फिर से सिंह जंगल में खदेड़ा गया. इससे कई गांवों में दहशत व्याप्त है.

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Author: ATUL PATHAK

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