गालूडीह. घाटशिला प्रखंड की हेंदलजुड़ी पंचायत के आमडांगा गांव की पुलिया से श्मशान घाट और कोदर नदी किनारे जाने के लिए सड़क नहीं रहने से बड़ी आबादी प्रभावित है. ग्रामीणों की स्थिति यह है कि उन्हें कीचड़ और झाड़ियों के बीच से होकर शवों को अंतिम संस्कार के लिए ले जाना पड़ता है. ग्रामीणों का कहना है कि जीते जी तो हम समस्याओं से जूझ ही रहे हैं, पर मरने के बाद भी हमारा संकट पीछा नहीं छोड़ रहा है.
चुनाव बीत गया, अभी तक आश्वासन अधूरा :
ग्रामीणों ने बताया कि घाटशिला उपचुनाव के दौरान पूर्व मंत्री सह चंदनकियारी के विधायक उमाकांत रजक ने वादा किया था कि झामुमो की जीत होने पर इस सड़क की समस्या का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जायेगा. चुनाव बीत गया और झामुमो की जीत भी हुई, पर सड़क निर्माण के लिए अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गयी. शासन की इस अनदेखी से ग्रामीणों में निराशा और आक्रोश व्याप्त है.
बरसात में पैदल चलना भी दूभर
ग्रामीणों का दर्द इस बात से समझा जा सकता है कि बरसात के दिनों में जब कच्ची सड़क कीचड़ में तब्दील हो जाती है, तब पैदल चलना भी दूभर हो जाता है. प्रकाश माझी की जमीन से धरनी माझी की जमीन तक सड़क की स्थिति अत्यंत दयनीय है. ग्रामीणों ने कहा कि बरसात में हम भगवान से प्रार्थना करते हैं कि गांव में किसी का निधन न हो, क्योंकि शव को झाड़ियों और दलदल के बीच से श्मशान तक ले जाना नरक जैसा अनुभव होता है.
विधायक सोमेश सोरेन से जल्द निर्माण की गुहार
ग्रामीणों ने वर्तमान विधायक सोमेश सोरेन से मांग की है कि इस जनहित की समस्या को गंभीरता से लेते हुए जल्द से जल्द सड़क निर्माण का कार्य शुरू करायें. सड़क बन जाने से न केवल अंतिम संस्कार के लिए जाने वालों को सुविधा होगी, बल्कि कोदर नदी की ओर जाने वाले किसानों और पशुपालकों को भी बड़ी राहत मिलेगी.