डुमरिया. डुमरिया प्रखंड के भालुकपातड़ा मौजा में लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा 30 बेड का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) शुरुआत से ही विवादों में है. भवन निर्माण निगम लिमिटेड से निर्मित भवन दूर से चकाचक दिखता है, लेकिन पास जाने पर घटिया गुणवत्ता साफ नजर आती है. भवन का सारा काम पूरा होने और रंगाई-पुताई के बाद अचानक रात में छत पर छोटे चिप्स से दोबारा ढलाई करना चर्चा का विषय बना हुआ है. ग्रामीणों का सवाल है कि यदि यह तकनीकी जरूरत थी, तो पेंटिंग से पहले क्यों नहीं की गयी? निर्माण कार्य के साइट इंचार्ज का कहना है कि यह ढलाई विभाग के अभियंता के आदेश पर की गयी है. नये भवन की दीवारों में अभी से कई जगह दरारें नजर आने लगी हैं. बारिश होने पर दीवारों से पानी रिसता है. इससे भवन की मजबूती पर सवाल खड़े हो गये हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि काली फ्लाई एश ईंटों से बने भवन में अनियमितता बरती गयी है.
ट्रांसफॉर्मर पहुंचा, लेकिन बिजली कनेक्शन नहीं:
भवन का निर्माण 12 अप्रैल, 2023 को शुरू हुआ था. इसे 11 अप्रैल, 2024 तक पूरा करना था. समय सीमा के बाद भी उद्घाटन नहीं हो सका है. हालांकि ट्रांसफॉर्मर पहुंच चुका है, लेकिन बिजली संयोजन नहीं होने के कारण अंतिम कार्य रुके हुए हैं. वर्तमान में सीएचसी पुराने जर्जर भवन में चल रहा है, जहां छत के छज्जे गिरने से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है. स्थानीय लोगों ने विभाग के उच्चाधिकारियों से मामले की जांच की मांग की है.कोट
– नया सीएचसी भवन लगभग पूरा हो गया है. अचानक छत की ढलाई करना नियम के अनुरूप नहीं लगता. यदि ढलाई प्रावधान के अनुसार था, तो रात को ढलाई करने की आवश्यकता क्यों पड़ी. यह सीएचसी भवन 90 गांवों के गरीब मरीजों की उम्मीद की किरण है. मामले की जांच की मांग उपायुक्त से करेंगे.
