निवाला छीन रहे गजराज, दहशत में जी रहे किसान

तालाब में दो घंटे की जलक्रीड़ा

चाकुलिया.

चाकुलिया प्रखंड में हाथियों का आतंक लगातार बढ़ रहा है. वर्तमान में लगभग 32 जंगली हाथी तीन से चार झुंडों में बंटकर उत्पात मचा रहे हैं. इनमें सबसे बड़ा झुंड 20 हाथियों का है, जो सोमवार की शाम से बड़ामारा, पुरनापानी, ज्वालाभांगा और जामडोहरी के आसपास घूम रहा है. हाथियों के दल ने बड़ामारा शिव मंदिर के समीप दासो मुर्मू और ईश्वर टुडू के खेतों में लगी गरमा धान की पकी फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है.

जान बचाकर भागे मजदूर, बोरे में बंद धान खा गये हाथी

ग्रामीणों ने बताया कि खेतों में गरमा धान की फसल पककर तैयार हो चुकी है. अत्यधिक गर्मी और तेज धूप के कारण धान की कटाई के लिए मजदूर नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे पिछले तीन दिनों से कटाई का काम बेहद धीमी गति से चल रहा है. सोमवार को खेत में धान की कटाई के साथ-साथ उसे झाड़ने का काम भी किया जा रहा था. झाड़े गये धान को बोरे में भरकर रखा गया था कि तभी शाम होते ही अचानक जंगली हाथी वहां धमक पड़े. हाथियों को देखकर खेत मालिक और मजदूर जान बचाकर मौके से भागे. इसके बाद हाथियों ने बोरे में भरकर रखा पूरा धान खा लिया और बची हुई कटी फसल को पैरों से रौंद डाला.

केले की फसल नष्ट की, फिर तालाब में जलक्रीड़ा

बड़ामारा पंचायत स्थित ज्वालाभांगा और पुरनापानी में जंगली हाथियों के झुंड ने गणेश हांसदा के केले के बागान पर धावा बोलकर पौधों को नष्ट कर दिया. इसके बाद 20 हाथियों का झुंड मंगलवार की सुबह जामडोहरी स्थित एक तालाब में जा पहुंचा. हाथियों ने लगभग 2 से 3 घंटे तक तालाब में रुककर जमकर स्नान किया और जलक्रीड़ा करते रहे. तालाब से निकलने के बाद हाथियों का दल दिघी और बड़ामारा के बीच स्थित मोहनडूंगरी जंगल में प्रवेश कर गया, जहां फिलहाल उनके डेरा जमाने की सूचना है.

गौशाला और फैक्ट्री के बागानों में भी बोला धावा

एक तरफ जहां मुख्य झुंड बड़ामारा क्षेत्र में था, वहीं दूसरी ओर चार जंगली हाथियों के एक छोटे दल ने चाकुलिया गौशाला तथा अमलागोड़ा स्थित साउथ ईस्ट केमिकल के आम के बागान को निशाना बनाया. हाथियों ने बागान में घुसकर पेड़ों पर लगे आम खाये और कई पेड़ों की डालियों को तोड़ डाला. इस बीच हाथियों ने चाकुलिया गौशाला से सटी बालाजी सोप (साबुन) फैक्ट्री के परिसर में भी घुसकर जमकर उत्पात मचाया. लगातार हो रहे हाथियों के इस हमले से क्षेत्र के किसानों और आम लोगों में दहशत का माहौल है.

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Author: ATUL PATHAK

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