East Singhbhum News : तालाब के भरोसे छात्रावास के सैकड़ों छात्र

ऊपर पावड़ा आवासीय विद्यालय में जल संकट, जलमीनार ठप व बिजली आपूर्ति चरमरायी

घाटशिला. घाटशिला प्रखंड के ऊपर पावड़ा जनजातीय आवासीय उच्च विद्यालय में पिछले तीन-चार दिनों से जल संकट गहरा गया है. छात्रावास में रहने वाले सैकड़ों छात्रों को सुबह और शाम करीब आधा किलोमीटर दूर सोनाराम सबर के घर के पास स्थित जलस्रोत से पानी लाना पड़ रहा है. कुछ छात्र तालाब के पानी का उपयोग करने को विवश हैं, जिससे उनके स्वास्थ्य पर भी खतरा मंडरा रहा है. जानकारी के अनुसार, विद्यालय की जलमीनार का सोलर प्लेट पिछले कुछ दिनों से हो रही बारिश और बादलों के कारण चार्ज नहीं हो पा रहा है, जिससे जलापूर्ति ठप है. वहीं, अन्य जलमीनार बिजली की अनियमित आपूर्ति के कारण काम नहीं कर रही है.

जिला कल्याण पदाधिकारी को भेजी रिपोर्ट : प्रभारी प्रधानाचार्य

विद्यालय के प्रभारी प्रधानाचार्य रामनरेश प्रसाद ने बताया कि इस गंभीर समस्या से विभाग और जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया है. विद्यालय में नये चापाकल गाड़ने और खराब जलमीनार को दुरुस्त करने के लिए जिला कल्याण पदाधिकारी को लिखित सूचना दी है.

अभिभावकों ने वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की:

ग्रामीणों और अभिभावकों ने विद्यालय प्रबंधन और विभाग के प्रति नाराजगी जाहिर की है. उन्होंने छात्रावास में रह रहे बच्चों के लिए तत्काल टैंकर या अन्य वैकल्पिक माध्यम से स्थायी जल व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है.

पांच माह से जलमीनार खराब, 50 परिवार पेयजल संकट में

गालूडीह. महुलिया पंचायत अंतर्गत गालूडीह आदिवासी बस्ती में लाखों की लागत से बनी सोलर जलमीनार पिछले पांच महीनों से खराब है. विभाग या प्रशासन ने सुधि नहीं ली है. गांव के करीब 50 परिवार गंभीर पेयजल संकट से जूझ रहे हैं. ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें उम्मीद थी कि जलमीनार के बनने से पेयजल की समस्या हमेशा के लिए दूर हो जायेगी. निर्माण के कुछ दिनों बाद जलमीनार खराब हो गयी. यह जलमीनार महज शो-पीस बनकर रह गयी है. ग्रामीणों को चिलचिलाती धूप में पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है. महिलाओं और बुजुर्गों को काफी परेशानी हो रही है. गांव में पेयजल की विकट स्थिति को देखते हुए शासन और प्रशासन के प्रति ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी जा रही है. ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद खराब जलमीनार को ठीक करने की दिशा में कोई पहल नहीं की गयी है. उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही जलापूर्ति बहाल नहीं की गयी, तो वे आंदोलन को विवश होंगे. फिलहाल, भीषण गर्मी में बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष करना यहां की नियति बन गयी है.

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Author: ATUL PATHAK

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