कोल्हान विश्वविद्यालय के 80 हजार स्टूडेंट्स का भविष्य अंधेरे में, वीसी, प्रोवीसी, रजिस्ट्रार समेत कई पद रिक्त

कोल्हान विश्वविद्यालय के 80 हजार स्टूडेंट्स का भविष्य अंधेरे में है. विश्वविद्यालय में वीसी, प्रोवीसी, रजिस्ट्रार समेत समेत कई अहम पद खाली हैं.

जमशेदपुर, संदीप सावर्ण : कोल्हान विश्वविद्यालय इन दिनों अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है. विश्वविद्यालय में कुलपति का पद मई 2023 से खाली है. पूर्व कुलपति डॉ गंगाधर पांडा के रिटायर होने के बाद अब तक किसी की नियुक्ति नहीं हो सकी है.

कोल्हान आयुक्त को सौंपा गया है कुलपति का प्रभार

राजभवन की ओर से कुलपति का प्रभार कोल्हान आयुक्त को सौंपा गया है. एक साल से आयुक्त प्रभार में हैं. उन्हें सिर्फ वेतन, पेंशन व अन्य रुटीन कार्य की जिम्मेदारी दी गयी है. नीतिगत फैसले लेने का अधिकार उन्हें नहीं है.

कई महत्वपूर्ण काम हो गए हैं ठप

नतीजा विश्वविद्यालय में कई महत्वपूर्ण कार्य ठप हो गये हैं. विश्वविद्यालय का समग्र विकास नहीं हो रहा है. इतना ही नहीं विश्वविद्यालय में प्रोवीसी, रजिस्ट्रार, फाइनांस ऑफिसर के साथ-साथ सीसीडीसी के पद भी रिक्त हैं. सभी पद प्रभारी के भरोसे चल रहे हैं. इसका खामियाजा झारखंड के छात्र-छात्राओं को भुगतना पड़ रहा है. ना तो समय पर डिग्री सर्टिफिकेट मिल रहा है और ना ही किसी तरह का प्रमाण पत्र. प्रशासनिक दृष्टिकोण से भी कई काम प्रभावित हो रहे हैं.

13 अगस्त 2009 को हुई थी कोल्हान विश्वविद्यालय की स्थापना

गौरतलब है कि कोल्हान विवि की स्थापना 13 अगस्त 2009 को हुई थी. इससे पूर्व सरायकेला-खरसांवा, पूर्वी सिंहभूम व पश्चिमी सिंहभूम जिले के कॉलेजों का संचालन रांची विवि के अधीन होता था. कोल्हान विवि के गठन को लेकर दलील दी गयी थी कि इसकी स्थापना होने से प्रमंडल के गरीब और आदिवासी छात्र-छात्राओं को कोल्हान में ही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी. लेकिन, जिस प्रकार से पिछले एक साल से स्थिति उत्पन्न हुई है, इसका सीधा असर करीब 80 हजार छात्र-छात्राओं पर पड़ रहा है. जनप्रतिनिधि से लेकर छात्र-छात्राएं राजभवन की ओर टकटकी लगाए हुए है कि न जाने कब स्थायी कुलपति समेत अन्य पदों पर नियुक्ति होगी.

कौन-कौन से काम हो रहे हैं प्रभावित

विश्वविद्यालय में वीसी और प्रोवीसी के पद रिक्त होने के कारण कई कार्य प्रभावित हो रहे हैं. सिंडिकेट, फाइनेंस कमेटी, एकेडमिक काउंसिल, एग्जामिनेशन बोर्ड, बिल्डिंग कमेटी की बैठक नहीं हो पा रही है. विद्यार्थियों का दीक्षांत समारोह तक लटका हुआ है, छात्र संघ का चुनाव नहीं हो पा रहा है. कारण कि सिंडिकेट की बैठक में विश्वविद्यालय से संबंधित विभिन्न एजेंडों को प्रस्तुत किया जाता है, जिस पर विचार-विमर्श के बाद आवश्यक निर्णय लिया जाता है. साथ ही, विभिन्न प्रस्तावों को पारित कर अनुमति के लिए सरकार के पास भेजा जाता है.

एकेडमिक काउंसिल में सिलेबस से संबंधित निर्णय लिए जाते हैं

इसी तरह, फाइनेंस कमेटी की बैठक में विश्वविद्यालय के वित्तीय, एकेडमिक काउंसिल की बैठक में सिलेबस आदि से संबंधित निर्णय लिये जाते हैं. वीसी समेत अन्य महत्वपूर्ण पद खाली रहने की वजह से इससे संबंधित कोई काम नहीं हो पा रहा है. हालत यह है कि विवि के अंतर्गत आने वाले कॉलेजों में आउटसोर्स पर जितने साफ-सफाई कर्मी या सुरक्षाकर्मी बहाल हैं, उनका कार्य रिन्युअल भी नहीं हो रहा है, जिससे कॉलेजों में साफ-सफाई भगवान भरोसे है.

कोल्हान विश्वविद्यालय की स्थापना कब हुई थी?

कोल्हान विवि की स्थापना 13 अगस्त 2009 को की गई थी. कोल्हान प्रमंडल के 3 जिलों सरायकेला-खरसावां, पूर्वी सिंहभूम एवं पश्चिमी सिंहभूम के कॉलेज इस विश्वविद्यालय के अधीन आते हैं.

कोल्हान विश्वविद्यालय की स्थापना से पहले कौन सा विश्वविद्यालय था?

कोल्हान विश्वविद्यालय की स्थापना से पहले कोल्हान प्रमंडल के तीनों जिलों पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम एवं सरायकेला-खरसावां जिलों के कॉलेज रांची विश्वविद्यालय के अधीन थे.

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By Mithilesh Jha

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