गुड़ाबांदा. गुड़ाबांदा प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय (उमवि) रेरुआ में शिक्षकों की घोर कमी से भविष्य के नौनिहालों की पढ़ाई ठप पड़ गयी है. बार-बार की गुहार के बाद भी शिक्षा विभाग की ओर से कोई पहल नहीं किए जाने से नाराज ग्रामीणों ने विद्यालय परिसर में जमकर विरोध-प्रदर्शन किया. ग्रामीणों का साफ कहना है कि जब शिक्षक ही नहीं हैं, तो बच्चे स्कूल जाकर क्या करेंगे.
8वीं तक का स्कूल, लेकिन शिक्षक सिर्फ 5वीं तक के:
विद्यालय में वर्तमान में कक्षा एक से लेकर आठवीं तक की पढ़ाई होती है, जिसमें कुल 105 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं. चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे स्कूल का जिम्मा महज दो शिक्षकों के कंधों पर है. ये दोनों शिक्षक भी प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 5) के बच्चों को पढ़ाने के लिए नियुक्त किए गए हैं. ऐसे में छठी, सातवीं और आठवीं के छात्रों को पढ़ाने वाला कोई नहीं है.
विभाग और जनप्रतिनिधि दोनों मौन
प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों को इस समस्या की पूरी जानकारी है, लेकिन समाधान के नाम पर अब तक केवल आश्वासन ही मिला है. वहीं, स्थानीय जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर भी लोगों ने भारी नाराजगी जतायी है. विरोध-प्रदर्शन के दौरान ग्राम प्रधान सुशील हांसदा ने कहा कि अगर जल्द ही शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हुई तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा. मौके पर मुख्य रूप से सुबोध मार्डी, राम हांसदा, कुनुराम बेसरा, मुनू हांसदा, रायमनी सोरेन, गुलाबी मुर्मू, बहुला हांसदा सहित दर्जनों ग्रामीण और अभिभावक उपस्थित थे.
परीक्षा नजदीक, कोर्स अधूरा : छात्रों में बढ़ी चिंता
जैसे-जैसे वार्षिक परीक्षाएं नजदीक आ रही हैं, विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों की धड़कनें तेज हो रही हैं. छात्रों का कहना है कि साल भर से उनका कोर्स अधूरा पड़ा है. बिना पढ़ाई किए वे परीक्षा में कैसे बैठेंगे? बच्चों का कहना है कि शिक्षकों के अभाव में उनका भविष्य अंधकार में नजर आ रहा है.
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