बहरागोड़ा . पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा प्रखंड अंतर्गत पानीपोड़ा-नागुड़साई गांव में एक बार फिर द्वितीय विश्व युद्ध के समय का एक शक्तिशाली जीवित बम मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गयी है. 17 मार्च की घटना के बाद यह दूसरा मौका है, जब सुवर्णरेखा नदी के तटीय क्षेत्र में इतना बड़ा विस्फोटक पाया गया है. मामले की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार के रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने स्वयं इसका संज्ञान लिया है. सैन्य विशेषज्ञों की टीम को जल्द से जल्द मौके पर पहुंचने के निर्देश दिये हैं.
मछली पकड़ने के दौरान दिखा ””मौत का गोला””:
जानकारी के अनुसार, बुधवार (15 अप्रैल) को गांव के कुछ लोग नदी में मछली पकड़ने गये थे, तभी उनकी नजर पानी के बीच फंसे एक विशाल लोहे के ढांचे पर पड़ी. करीब से देखने पर पता चला कि यह बम है, जिसका डर ग्रामीणों के मन में लंबे समय से बैठा हुआ है. स्थानीय लोगों ने तुरंत इसकी सूचना बहरागोड़ा पुलिस को दी. पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए वरीय अधिकारियों को सूचित किया और घटनास्थल की घेराबंदी कर दी.दो जवान व मजिस्ट्रेट तैनात, आजीविका पर संकट:
प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर बुधवार रात से घटनास्थल पर दो जवानों और एक मजिस्ट्रेट की तैनाती कर दी है. आम नागरिकों को वहां जाने पर रोक लगा दी गयी है. ग्रामीणों का कहना है कि इस नदी से उनकी आजीविका जुड़ी है, लेकिन बार-बार बम मिलने से वे अब पानी में उतरने से डर रहे हैं. स्थानीय लोगों ने मांग की है कि केवल इस बम को हटाना काफी नहीं है, बल्कि पूरी नदी और तट की मेटल डिटेक्टर से सघन जांच होनी चाहिए.द्वितीय विश्व युद्ध के समय एक विमान से 30-40 बम गिराये गये थे:
स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान बहरागोड़ा का यह हवाई मार्ग विमानों की आवाजाही के लिए इस्तेमाल होता था. कहा जाता है कि एक तकनीकी खराबी या आपात स्थिति के कारण एक विमान ने करीब 30-40 बम इसी क्षेत्र में गिरा दिये थे. सेना ने तब अधिकांश बम हटा लिये थे, लेकिन कुछ बम कीचड़ और गहरे पानी में धंस गये थे. अब नदी के चौड़ीकरण और गिरते जलस्तर के कारण ये बम धीरे-धीरे सतह पर आ रहे हैं.एक माह में दूसरी बार
–17 मार्च, 2026 :
इसी क्षेत्र में पहला बम मिला था, जिसे सेना ने आठ दिनों के बाद सुरक्षित तरीके से विस्फोट कर नष्ट किया था. वह धमाका इतना विकराल था कि उसकी गूंज कई किलोमीटर तक सुनी गयी थी.–
