कोल्हान में कमजोर पड़ा मॉनसून, किसान चिंतित

गालूडीह : भारतीय मौसम विभाग (आइएमडी) पुणे की रिपोर्ट पर दारीसाई मौसम विभाग के वैज्ञानिक विनोद कुमार ने बताया कि इस वर्ष कोल्हान के तीन जिलों में मॉनसून कमजोर पड़ गया है. वैसे देश भर में औसत से 110 प्रतिशत अधिक बारिश की संभावना है. झारखंड के कोल्हान में मॉनसून कमजोर पड़ने से अल्पवृष्टि की […]

गालूडीह : भारतीय मौसम विभाग (आइएमडी) पुणे की रिपोर्ट पर दारीसाई मौसम विभाग के वैज्ञानिक विनोद कुमार ने बताया कि इस वर्ष कोल्हान के तीन जिलों में मॉनसून कमजोर पड़ गया है. वैसे देश भर में औसत से 110 प्रतिशत अधिक बारिश की संभावना है. झारखंड के कोल्हान में मॉनसून कमजोर पड़ने से अल्पवृष्टि की आशंका प्रबल है. झारखंड के अन्य प्रमंडलों और जिलों में मॉनसून असरदार है.

जहां बारिश बेहतर होगी. आषाढ़ में बारिश नहीं होने से किसान चिंतित हैं. धान का चारा तैयार हो गया है. किसानों ने हल जोत कर खेत तैयार कर वर्षा के इंतजार में बैठे हैं.
बारिश होगी, तो रोपनी शुरू होगी. विनोद कुमार ने बताया तीन-चार दिनों तक झमाझम बारिश की जरूरत है. तब रोपनी शुरू हो सकती है.
बाघुड़िया में तैयार चारा, लेकिन खेत सूखे हुए हैं.
जून में मात्र 105 मिमी बारिश
विनोद कुमार ने बताया कि इस वर्ष जून में मात्र 105 मिमी वर्षा हुई है. जबकि जून की औसत वर्षा 218 मिमी है. जुलाई माह में 11 तारीख तक 79 मिमी वर्षा हुई है. जुलाई की औसत वर्षा 302 मिमी है. एक जुलाई को 5.4, दो को 3.4, तीन को 7, चार को 39.2, पांच को 2, छह को 1.2, सात को शून्य, आठ को शून्य, नौ को 15.8, दस को 5 और 11 जुलाई को शून्य मिमी वर्षा हुई है.
धान का चारा तैयार, वर्षा के अभाव में खेत सूखे
आइएमडी पुणे की रिपोर्ट पर दारीसाई मौसम विभाग ने दी जानकारी
इस बार जून में औसत वर्षा 218 की जगह मात्र 105 मिमी हुई
2014 में जून में हुई थी 109 मिमी बारिश, 2015 में जून में हुई थी 142 मिमी बारिश
2014-15 में इससे बेहतर वर्षा हुई थी
विनोद कुमार ने बताया कि वर्ष 2014 और 15 में इस वर्ष के अपेक्षा बेहतर वर्षा जून-जुलाई में हुई थी. वर्ष 14 में जून में 109 मिमी वर्षा हुई थी. जबकि जुलाई में औसत से अधिक 372 मिमी वर्षा हुई थी. वहीं वर्ष 15 में जून में 142 मिमी और जुलाई में औसत से दोगुना 644 मिमी वर्षा हुई थी.

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