साल वनों को उजाड़, धड़ल्ले से तोड़े जा रहे हैं पहाड़

नक्सलियों के गढ़ गुड़ाबांदा और धालभूमगढ़ के बीहड़ों में धड़ल्ले से तोड़े जा रहे हैं पहाड़ सुवर्णरेखा परियोजना समेत अन्य सरकारी योजनाओं में पत्थरों का इस्तेमाल धालभूमगढ़ : नक्सलियों के गढ़ माने जाने वाले धालभूमगढ़ के उत्तर स्थित बीहड़ और इसकी सीमा से सटे गुड़ाबांदा के बीहड़ों में पत्थर माफियाओं का राज चल रहा है. […]

नक्सलियों के गढ़ गुड़ाबांदा और धालभूमगढ़ के बीहड़ों में धड़ल्ले से तोड़े जा रहे हैं पहाड़

सुवर्णरेखा परियोजना समेत अन्य सरकारी योजनाओं में पत्थरों का इस्तेमाल
धालभूमगढ़ : नक्सलियों के गढ़ माने जाने वाले धालभूमगढ़ के उत्तर स्थित बीहड़ और इसकी सीमा से सटे गुड़ाबांदा के बीहड़ों में पत्थर माफियाओं का राज चल रहा है. अवैध तरीके से पहाड़ तोड़े जा रहे हैं और प्राकृतिक साल वनों को उजाड़ा जा रहा है. तोड़े गये पत्थरों को माफिया बेखौफ होकर टपा रहे हैं. हाल के वर्षों में धालभूमगढ़ अवैध पत्थरों का सबसे बड़ा बाजार बन गया है. करोड़ों मूल्य के बिना चालान वाले अवैध पत्थरों का प्रयोग सुवर्णरेखा परियोजना और अन्य सरकारी योजनाओं में हो रहा है. विकास का बहाना बना कर प्रशासन तमाशबीन बना है. संवेदक और माफिया मालामाल हो रहे हैं.
नक्सल प्रभावित इलाका होने के कारण प्रशासनिक पदाधिकारी इन बीहड़ों में नहीं जाते हैं. इसी का फायदा उठा कर ही माफिया बीहड़ों में पहाड़ों को तोड़वा रहे हैं. रात-दिन पत्थरों को ढोया जा रहा है. हर रोज लाखों के पत्थर टपाये जा रहे हैं. दर्जनों ट्रैक्टर और ट्रक अवैध पत्थरों की ढुलाई में लगे हैं. रोकने-टोकने वाला कोई नहीं है. धालभूमगढ़ में कई जगहों पर भंडारण की आड़ में इन अवैध पत्थरों को जमा किया जा रहा है. अन्य राज्यों में भी पत्थर भेजे जा रहे हैं. पत्थरों का प्रयोग सरकारी योजनाओं में भी हो रहा है. इसलिए प्रशासनिक महकमा मौन है.
संबंधित संवेदक पत्थरों के बदले दोगुना रायल्टी दे रहे हैं. पत्थर हैं वन विभाग के मगर खनन विभाग का राजस्व मिल रहा है. इस अवैध खनन के कई पहाड़ियां मैदान बन गयी है. जबकि कई का अस्तित्व मिटने के कगार पर है.
जिला में अवैध पत्थरों का सबसे बड़ा बाजार बन गया है धालभूमगढ़
वन विभाग ने पकड़ा है मामला
वन विभाग ने धालभूमगढ़ में कई सड़कों के निर्माण में वन भूमि के पत्थरों के प्रयोग का मामला पकड़ा है. में संबंधित विभाग के कार्यपालक अभियंता को नोटिस भी दिया है. इसके पूर्व सुवर्णरेखा परियोजना में वन भूमि के पत्थरों के प्रयोग के मसले पर वन विभाग ने परियोजना के कार्यपालक अभियंता को नोटिस दिया था.
माफियाओं ने अफसरों को धमकाया
सूत्रों के मुताबिक अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए कार्रवाई करने वाले कई अफसरों को माफिया तत्वों ने पत्र के माध्यम से नक्सली के नाम पर धमकी भी दी है. इसकी सूचना संबंधित अफसरों ने अपने वरीय अधिकारी को दी है.
अवैध खनन रोकने के लिए खुफिया विभाग ने भेजी है रिपोर्ट
सूत्रों के मुताबिक इस अवैध खनन पर रोक लगाने के लिए खुफिया विभाग ने सरकार को कई बार रिपोर्ट भेजी गयी है, लेकिन इस दिशा में अभी तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है. नतीजतन प्रकृति को उजाड़ने का काम जारी है.

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