जेसीबी मालिक के खाते में जा रहा पैसा
गालूडीह : भूमि संरक्षण विभाग के तहत चल रहे डोभा निर्माण कार्य किया जा रहा है. करीब 25 हजार प्राक्कलित राशि से बनने वाले डोभा में दस प्रतिशत पैसा काट कर लाभुक किसान के खाते में पैसा देने का नियम है. लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है. किसान लाभुक के खाते से सीधे बैंक से […]
गालूडीह : भूमि संरक्षण विभाग के तहत चल रहे डोभा निर्माण कार्य किया जा रहा है. करीब 25 हजार प्राक्कलित राशि से बनने वाले डोभा में दस प्रतिशत पैसा काट कर लाभुक किसान के खाते में पैसा देने का नियम है. लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है. किसान लाभुक के खाते से सीधे बैंक से ही डोभा की खुदाई करने वाले जेसीबी मालिक के खाते में पैसा ट्रांसफर हो जा रहा है. यही डोभा निर्माण का असल सच है. ऐसा कमोवेश सभी प्रखंड और पंचायतों में हो रहा है. जेसीबी मालिक सीधे विभागीय पदाधिकारियों के माध्यम से बैंक से संपर्क कर यह खेल खेल रहे हैं.
लाभुक किसान की जमीन में डोभा तो खुदाई हो रही है. लेकिन किसान के हाथ में पैसा नहीं आ रहा है. जोड़सा पंचायत के एक किसान की ओर से बैंक को लिखे कागजात में स्पष्ट है कि डोभा मद में आवंटित राशि जेसीबी मालिक के खाते में ट्रांसफर हो रहा है. इस विषय पर कई लोग तर्क दे रहे हैं ऐसा नहीं होगा तो समय पर डोभा का निर्माण संभव नहीं हैं. सच तो यह है कि लाभुक किसानों के नाम पर चलायी जा रही इस योजना में किसान को जमीन देने के अलावे और कहीं कोई संलिप्तता नहीं है.
घाटशिला प्रखंड 371 डोभा का लक्ष्य : भूमि संरक्षण विभाग के तहत इस प्रखंड में 371 डोभा निर्माण की स्वीकृति मिली है. इसमें से 101 डोभा निर्माण का कार्य पूरा हो गया है. सभी डोभा की खुदाई जेसीबी से की जा रही है. प्रभारी बीडीओ मृत्युंजय कुमार ने बताया कि 371 की स्वीकृति मिली है. 101 का काम पूरा हो गया है. 15 जून तक शेष बचे डोभा का निर्माण कार्य भी पूरा कर लिया जायेगा, ताकि बरसात का पानी डोभा में संचय हो सके.
मनरेगा डोभा में भी मशीन का उपयोग : भूमि संरक्षण विभाग की आड़ में ही मनरेगा के तहत बन रहे डोभा निर्माण में कई जगहों पर मजदूरों के बजाय मशीन का धड़ल्ले से प्रयोग हो रहा है. प्रखंड में मनरेगा के तहत 80 का निर्माण मजदूरों कराने की बात कही जा रही है, लेकिन सच कुछ और है.