ग्रामीण करते हैं वन की रक्षा, डरते हैं माफिया

मो परवेज गालूडीह : आदिवासी समाज में वनों को माता-पिता का दर्जा प्राप्त है. वनों की सुरक्षा को वे नैतिक जिम्मेदारी समझते हैं. जिम्मेदारी का बखूबी निर्वाह करते हुए हेंदलजुड़ी पंचायत के लोगों ने मिसाल पेश की है. यहां के ग्रामीणों ने कालाझोर वन सुरक्षा समिति का गठन किया है. ये लोग रात भर जाग […]

मो परवेज

गालूडीह : आदिवासी समाज में वनों को माता-पिता का दर्जा प्राप्त है. वनों की सुरक्षा को वे नैतिक जिम्मेदारी समझते हैं. जिम्मेदारी का बखूबी निर्वाह करते हुए हेंदलजुड़ी पंचायत के लोगों ने मिसाल पेश की है. यहां के ग्रामीणों ने कालाझोर वन सुरक्षा समिति का गठन किया है. ये लोग रात भर जाग कर वनों की रक्षा करते हैं. वन माफिया भी इनकी वजह से जंगल आने से डरते हैं. फलस्वरूप घाटशिला रेंज के कालाझोर, भूतियाकोचा, लोवागोड़ा, राजाबासा, पीड्राबांद मौजा से सटे सुखना पहाड़ के करीब तीस हेक्टेयर क्षेत्र में साल के वन लहलहा रहे हैं.

समिति के अध्यक्ष दुलाल चंद्र हांसदा ने कहा कि सिर्फ भाषण देने से नहीं, त्याग से पर्यावरण की रक्षा होगी. 90 के दशक से कालाझोर वन सुरक्षा समिति सुखना पहाड़ में वनों की रक्षा में मुस्तैद है. पंचायतीराज व्यवस्था आने के बाद पर्यावरण के प्रति सजगता बढ़ी. यहां वनों की कटाई पर कठोर कानून है. कच्चे वृक्षों को काटते पकड़े जाने पर जुर्माना देना होता है. गांव से बहिष्कृत हो सकते हैं. अभियान में महिलाएं, बच्चे भी साथ देते हैं. ग्रामीण परंपरागत हथियारों के साथ जंगल की तलहटी में जुलूस निकाल कर वन रक्षा का संकल्प लेते हैं.

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