सूख गये पहाड़ी झरना पानी के लिए हाहाकार

चाकुलिया : वनों के विनाश और पहाड़ों से छेड़छाड़ का कुप्रभाव साफ दिखायी देने लगा है. चाकुलिया के उत्तर स्थित पहाड़ों के झरने सूख गये हैं. पूर्व में इन झरनों से गर्मी के मौसम में पानी बहा करता था. इससे ग्रामीणों को राहत मिलती थी. ऐसा पहली बार हुआ है कि तमाम झरने सूख गये […]

चाकुलिया : वनों के विनाश और पहाड़ों से छेड़छाड़ का कुप्रभाव साफ दिखायी देने लगा है. चाकुलिया के उत्तर स्थित पहाड़ों के झरने सूख गये हैं. पूर्व में इन झरनों से गर्मी के मौसम में पानी बहा करता था. इससे ग्रामीणों को राहत मिलती थी. ऐसा पहली बार हुआ है कि तमाम झरने सूख गये हैं. छोटे-मोटे जंगली जानवरों को पीने के लिए पानी नहीं मिल रहा है. पहाड़ों से सटे इस इलाके में तेजी से जल स्तर गिरा. कुएं व तालाब भी सूख गये हैं. अधिकांश चापाकल खराब पड़े हैं. पहाड़ों से सटे गांवों में पानी के लिए हाहाकार मचा है.

चाकुलिया के जयनगर से पहाड़ी श्रृंखला शुरू होता है. ग्रामीणों के मुताबिक इस पहाड़ के झरने लगभग सूख गये हैं. जामिरा में थान झरना सूख गया है.
बर्डीकानपुर के पास पहाड़ पर स्थित देव स्थान के पास वाला झरना भी लगभग सूख गया है. गोटाशिला पहाड़ के पास स्थित झरना सूखने के कगार पर है. घाघरा के पास पहाड़ों पर पांच झरने सूख गये हैं. ग्रामीणों के मुताबिक पहले इन झरनों से गर्मी में भी पानी बहता था. ग्रामीण झरना का स्वच्छ पानी पीते थे. झरना के पानी से नहाते थे. मवेशियों को भी पानी पिलाते थे. झरना के पानी से तालाब भर जाते थे. घाघरा के ग्राम प्रधन राजेंद्र नाथ सिंह और ग्रामीणों ने कहा कि ऐसा पहली बार हुआ है कि अधिकांश झरने सूख गये हैं. गर्मी में भी घाघ झरना से पानी बहा करता था.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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