पातीपानी की कहानी : बिजली आये हो गये 15 साल, बिजली विभाग के कर्मियों को चढ़ावा के लिए नहीं दे पाते हैं चंदा
पटमदा/जमशेदपुर : हम जाति और धर्म से पैदा हुए भेदभाव की खाई को पाट भी लें, लेकिन भ्रष्टाचार से पैदा हुए छुआछूत को खत्म करना संभव नहीं. जमशेदपुर शहर से महज एक किलोमीटर दूर पारडीह से डिमना जानेवाले रास्ते में है पातीपानी गांव (बोड़ाम प्रखंड अंतर्गत). इस गांव में रहनेवाले 17 बिरहोर परिवार इसी भ्रष्टाचार से पैदा हुए छुआछूत के शिकार हैं. इनके गांव में बिजली आज से करीब 15 साल पहले पहुंच चुकी है.
लेकिन इसकी रोशनी बिरहोरों के इन 17 घरों में नसीब नहीं. सरकार ने इन्हें करीब 10 साल पहले रहने के लिए बिरसा आवास दिये, लेकिन इन आवासों में बिजली के लिए कोई पहल नहीं की. सरकारी प्रावधान के मुताबिक, आदिम जनजाति होने के नाते इन्हें मुफ्त में बिजली कनेक्शन और बिजली दी जानी है. दावे कुछ
कर्मचारियों को पैसा कहां से दें : दशरथ
पातीपानी गांव में संपन्न परिवारों के घरों में पिछले 15 वर्षों से बिजली है. पर उन्हें बिजली नहीं दी गयी. विभाग के कर्मचारी लोगों से बिजली के लिए पैसे की मांग करते हैं. किसी तरह पेट पालने वाले बिरहोर परिवार पैसे देने में सक्षम नहीं हो पाते हैं. गांव के दस बिरहोर परिवारों को बिरसा आवास भी उपलब्ध नहीं है. गांव के ज्यादातर चापाकल खराब पड़े हुए हैं.
गांव में कैंप लगा कर िबजली दी जायेगी : जीएम
िवभाग के जीएम एपी सिंह ने कहा िक कैंप लगाकर गांव में बिरहोर परिवार को बिजली का कनेक्शन दिया जायेगा. अबतकगांव में बिजली पहुंचने के बाद आदिम जनजाति बिरहोर परिवार को क्यों बिजली नहीं मिली है. इसकी जांच की जायेगी. उनके घरों में बिजली कनेक्शन देने में पैसे नहीं देने से अबतक लाइन नहीं लगायी है, ये गंभीर बात है. जांच में दोषी पाये जाने पर निश्चित तौर पर सीधी कार्रवाई भी की जायेगी.
